आदिवासी

आदिवासी

  • December 1, 2018

मेरे जन्म से लेकर अब तक, ६० वर्षों से भी अधिक समय दिल्ली में रहते हुए, आदिवासियों की केवल एक धुंधली-सी तस्वीर ही मेरे दिमाग में रही है। उन्हें नजदीक से देखने का एक अवसर भी आया जब मेरे एक…

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मन उड़ चला विदेश पेरिस – १

मन उड़ चला विदेश पेरिस – १

  • December 1, 2018

मैं और मेरा परिवार विदेश पेरिस जाते हैं। वहाँ हमने बहुत कुछ देखा और सीखा।  पापा अक्सर अन्तरराष्ट्रीय सेमिनार में भाग लेने योरप जाया करते हैं। इस बार वह पेरिस जा रहें थे। मम्मी ने भी साथ चलने की इच्छा…

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The Tribals

The tribals

  • December 1, 2018

Living, since my birth in Delhi more than 60 years ago, I have only a faint appreciation of what tribals look like. An opportunity to see them from close quarters was lost due to the cancellation of a connecting flight…

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सिंहासन बत्तीसी – कहानी पुतली मदनमोहिनी की

सिंहासन बत्तीसी – कहानी पुतली मदनमोहिनी की

सिंहासन बत्तीसी के अगले भाग में राजा विक्रमादित्य के त्याग और परोपकार के बारे में जानिए। उन्नीसवें दिन स्वयं को भाग्य के भरोसे छोड़, राजा भोज पुनः चमत्कारी सिंहासन की ओर बढ़े। उन्होनें सोच लिया था कि आज वे अवश्य…

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रुद्र की लेह-लद्दाख यात्रा

रुद्र की लेह-लद्दाख यात्रा

  • October 1, 2018

रुद्र की लेह-लद्दाख यात्रा बहुत ही मनोरंजक रही। उसने वहाँ के बारे में बहुत कुछ जाना। रुद्र की जिद्द पर प्रतिमा मान गयी, “ठीक है, तुम अपने पापा के पास लेह घूमने जा सकते हो, लेकिन मैं आफिस के कारण…

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सिंहासन बत्तीसी – कहानी पुतली प्रियदर्शनी की

सिंहासन बत्तीसी – कहानी पुतली प्रियदर्शनी की

  • October 1, 2018

सिंहासन बत्तीसी के अगले भाग में राजा विक्रमादित्य की दानवीरता की कहानी सुनिए। अट्ठारहवे दिन राजा भोज पुनः नया उत्साह संजोकर राज-दरबार में पहुंचे। जैसे ही राजा ने सिंहासन की ओर कदम बढ़ाया सिंहासन की अट्ठारहवी पुतली प्रियदर्शनी प्रकट होकर…

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हिंदी – राष्ट्रीय भाषा की घोषणा

हिंदी – राष्ट्रीय भाषा की घोषणा

  • October 1, 2018

भाई-बहन रमन और सुधीर को हिन्दी के राष्ट्रिय भाषा होने या न होने के लिए अपने विचार प्रकट करने थे। आप क्या सोचते हैं? राष्ट्रीय स्तर की एक सभा का आयोजन हुआ। उद्देश्य 'राष्ट्रीय भाषा' से सम्बंधित था। आयोजकों ने…

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बालक शंकर

बालक शंकर

  • October 1, 2018

आइये, आठवीं सदी में एक गरीब ब्राह्मण परिवार में पैदा हुए बालक शंकर की कहानी सुनिए। आज एक अक्टूबर है। प्रत्येक महीने के पहले दिन विद्यालय के प्रधानाचार्य प्रार्थना के बाद बच्चों को एक कहानी सुनाया करते हैं। उनका कहानी…

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