Sandhya Goel (संध्या सुगम्या)

मेरी लेखनी मेरी सखी भी है, मार्गदर्शक भी

मेरी हमसफ़र भी है, मेरी चाहत भी

मेरा जूनून भी है और मेरा सुकून भी

मैं नींव से जुडी हूँ, क्योंकि मैं मानती हूँ कि बच्चे जैसा पढ़ेंगे, सुनेंगे, वैसे ही उनके विचार बनेंगे, और जैसे उनके विचार होंगे, वैसे ही वे इन्सान बनेंगे। एक बेहतर दुनिया बनाने में मेरा यह छोटा सा योगदान है।

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