Kalpana Dubey

बचपन से ही किताबों के बीच अपने आप को पाया, वे आज तक मेरी हम सफर हैं। अध्यापिका होने के नाते अक्सर बच्चों की समस्याओं से रूबरू होना, उन्हें जानना, मेरा शौक बन गया है। बचपन में सुनी कहानियों के पात्र आज भी मेरे इर्द–गिर्द घूमते हैं। प्रकृति को नजदीक से महसूस करना अच्छा लगने के साथ–साथ दैवीय सत्ता का एहसास कराता है। मेरा प्यारा, नन्हा पोता वैकुंठ मेरा सबसे अच्छा साथी है। उसकी प्यारी बातें मुझे काल्पनिक दुनियाँ में ले जाती हैं।

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