Himanshu Singhal

जब से पढ़ना सीखा, तभी से कॉमिक्स आदि पढ़ता आ रहा हूँ। बचपन कब का बीत गया, लेकिन बचपन का यह शौक आज भी बरक़रार है। इतना बाल साहित्य पढ़ा है कि मुझे लगा कि मैं भी बच्चों के लिए लिख सकता हूँ। नींव पढ़ने पर इससे जुड़ने की इच्छा हुई। परिणाम स्वरुप आपके सामने हूँ।

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