आभार गुरु का

आपने ज्ञान दिया मुझ तुच्छ को,

आपने साफ किया हर “कुछ” को।

आप न होतीं, मैं न होती,

पत्थर कभी न बनता मोती।

आप गुरु मैं शिष्या आपकी,

आगे बढूं उंगली पकड़ आपकी।

आभार गुरु का प्रकट करुँ कैसे,

मैं पात आप तरुवर जैसे।

पथ दर्शक आप और पथ है मेरा,

ज्ञान आपका नाम है मेरा।

हे शिक्षिका! आपको शत शत नमन है मेरा।

Lavanya Rajmalani, Hindi poem, 11 to 13 years
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