“एक बच्चा जो अभी पढ़ता है, आगे चलकर एक समझदार वयस्क बनता है” – अज्ञातकृत

• आनंद के लिए पढ़ने का महत्व

आजकल बच्चे तरह तरह की गतिविधियों से घिरे हुए हैं। स्कूल में होने वाले खेल-कूद के अतिरिक्त हफ्ते के अंत में होने वाली या गर्मी की छुट्टियों में होने वाली कार्यशालाएं भी आजकल बचपन का अहम हिस्सा बन चुकी हैं। हम अपने बच्चों को सिखाते हैं कि टीम का हिस्सा कैसे बने या रचनात्मक कैसे बनें जिससे वे अपनी रुचि पढ़ाई के अलावा और चीज़ों में भी बढ़ाएँ। इन सबमें आनंद के लिए किताबे पढ़ना हमेशा से ही मनपसंद व अहम रहा है।

कोई भी वयस्क कहानी पढ़ने के बाद तनाव मुक्त महसूस करता है। वह उस समय में अपने आप को जान पाता है। पर अगर किसी बच्चे को पढ़ना न सिखाया गया हो तो वह वयस्क होकर भी उसका आनंद नहीं उठा पाएगा। सुसेक्स यूनिवर्सिटी के एक शोध के अनुसार , किताब पढ़ना तनाव से मुक्ति पाने का सबसे अच्छा तरीका है और मात्र छह मिनट पढ़ना भी हमारे तनाव के स्तर को दो तिहाई से भी ज़्यादा घटा सकता है।

पढ़ने का महत्व

किसी भी बच्चे के पूर्ण व्यक्तित्व विकास के लिए पढ़ना आवश्यक है। जब किसी बच्चे के हाथ में पढ़ने के लिए किताब दी जाती है तो वह किसी बाहरी दखल के बिना खुद अपना मनोरंजन करना सीखता है। पढ़ने से हम दैनिक जीवन से बाहर अपने कल्पना के संसार में पहुँच जाते हैं। जब हम पढ़ते हैं, तब हम विभिन्न संस्कृतियों, व्यक्तित्वों तथा परिस्थितियों के बारे में जानते हैं। कहानियाँ पढ़ना आपके बच्चे को नयी–नयी चीजों से अवगत कराने का सबसे सटीक तरीका है। यूनिवर्सिटी ऑफ बफलो के अध्ययन में पता लगा कि संभावित वास्तविकताएँ व काल्पनिक कथानक की पहुँच हमें नयी भावनाओं व अनुभूतियों से रूबरू कराती है। वो हमें अलग अलग संस्कृतियों को समझाकर दूसरे लोगों को सांत्वना देना भी सिखाती है।

व्यक्तित्व के बारे में कहानियाँ पढ़िये

अलग-अलग विषयों को पढ़ने का महत्व

आपने कितनी बार अपने बचपन की किसी ऐसी घटना के बारे में सोचा जो आपके आज के जीवन को भी प्रभावित कर रही है? बच्चों का मस्तिष्क एक स्पंज की तरह होता है। वे अपने आसपास मौजूद सब कुछ सोख लेते हैं जो एक वयस्क के रूप में उनके व्यक्तित्व को आकार देता है। इसी प्रकार से भिन्न भिन्न चीज़ें पढ़ना बेहतर शिक्षण का अच्छा स्रोत है, अध्ययन की किताबों के बजाए। कहानियों में कल्पनाएँ होती हैं, कविताएँ भाषा को रचनात्मक बनती हैं, कॉमिक चित्रों व लेखन का अच्छा तालमेल प्रस्तुत करती हैं और शैक्षणिक लेख किसी भी विषय को गहराई में समझाते हैं।

पढ़ने का महत्व

एक प्रोफेसर एनी ई. कनिंघम ने एक शोध पत्र लिखा और पाया के नियमित रूप से पढ़ना हमें होशियार बनाता है। बार-बार पढ़ना न सिर्फ हमें जानकारी एकत्रित करने में मदद करता है, बल्कि उस जानकारी को जीवन भर याद रखने में भी मदद करता है। हमें चाहे यह महसूस हो या न हो, किन्तु पढ़ने से हमारे दिमाग में नयी-नयी जानकारी का भंडार हो जाता है जो न जाने कब हमें काम आ जाए।

भारत की संस्कृति की कहानियाँ पढ़िये

पढ़ने के लिए तकनीक का प्रयोग क्यों करना चाहिए?

तकनीक हमारे आज का अहम हिस्सा है । टेलीफ़ोन से पहले व्यक्ति में पत्र की प्रतीक्षा करने का संयम था। हर पीढ़ी का यह मानना है कि तकनीक ने भटकाने का काम किया है, किन्तु अगर हम उसका सही प्रयोग करें तो वह हमें बहुत अच्छे अनुभव दे सकती है। बच्चों को भी इंटरनेट बहुत सारी शिक्षा व मनोरंजन प्रदान करता है। आप समय या जगह के कारण बाधित नहीं होते और दुनिया के किसी भी कोने से जब चाहे अपनी आवश्यकता अनुसार इंटरनेट से सामग्री प्राप्त कर सकते हैं। अगर कम्प्युटर न हो तो आप भारत के विभिन्न पहलुओं व मसलों के बारे में अपने बच्चों को कैसे बताएँगे?

पढ़ने का महत्व

कम्प्युटर या कोई अन्य मोबाइल यंत्र पर काम करने से बच्चों का कौशल बढ़ता है। वे अपनी गति से उसपर पढ़ सकते हैं और स्वतंत्रता से उसपर काम करना उन्हे गर्व की अनुभूति देता है।

अलग–अलग भाषाएँ क्यों पढ़ें?

कोई भी व्यक्ति जिसे एक से ज़्यादा भाषा आती हो, अपने आप में जानता है कि उसकी क्या उपलब्धि है। किसी भाषा पर अच्छी पकड़ होने से हम अपनी भावनाओं को सही प्रकार से अभिव्यक्त कर पाते हैं। हर भाषा की संस्कृति है, उसका अपना अस्तित्व है। यह ज़रूरी है कि हम हर भाषा की बारीकियों को अच्छे से समझें और एक दूसरे से बात करते में शब्दों का अच्छा प्रयोग कर सकें।

पढ़ने का महत्व

वर्ष २००४ में मनोवैज्ञानिक एलिन बाइलिस्टोक और मिशेल मार्टिन री द्वारा किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि जो लोग दो या उससे ज़्यादा भाषा बोल सकते हैं, उनका मस्तिष्क गतिशील होता है और वे अधिक कुशलता से परेशानियाँ या उलझनें हल कर लेते हैं। चूंकि द्विभाषिक मजबूरी में अकसर भाषा बदलते हैं इसलिए उनके दिमाग की अच्छी कसरत हो जाती है जिससे वे तेज़ एवं बहुकार्यन हो जाते हैं।

ऑडियो कि आवश्यकता क्यों पड़ती है?

बच्चे एक स्तर पर पढ़ते हैं किन्तु उससे ऊंचे स्तर पर सुन पाते हैं। अगर आपका बच्चा अपनी भाषा सुधारना चाहता हो तो आप क्या करेंगे? सुनने से बहुत कुछ सीखा जा सकता है जैसे शब्दों का सही उच्चारण, नए शब्द और नयी भाषा भी। सुनने की समझ पढ़ने की समझ से पहले आती है। कोई भी शब्द बोलने, लिखने या पढ़ने से पहले ज़रूरी है के उसे सुना जाए।

पढ़ने का महत्व

नीव एक ऑनलाइन मासिक पत्रिका है जिसका जन्म बच्चों को पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करने की इच्छा से हुआ, जिससे वे एक से ज़्यादा भाषाओं में पढ़ पाएँ और भारत की संस्कृति को जान पाएँ। नीव ५ से १५ साल तक के बच्चों के लिए है और अलग-अलग विषय जैसे संस्कृति, समाज, शिक्षा, रोमांच, प्रकृति व जानवरों पर करीब ५० लेख प्रकाशित होते हैं। यह लेख फिक्शन, नॉन-फिक्शन, कविता, हास्य, हस्त एवं शिल्पकला के रूप में हो सकते हैं जिनमें से अधिकतर की ऑडियो रिकॉर्डिंग भी दी जाती है। आपके बच्चे भी नीव में अपना योगदान दे सकते हैं!

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