ज्ञान और विधा की परिभाषा का 

जीती हुई मिसाल है वह।।

हम कली थे छोटे से

हमको फूल बन महकना सिखाती वह।।

जीवन के पथ कर अग्रसर हो ना

हम को उन्होंने सिखलाया।।

सही गलत में भेद करना

यह समझ भी उनसे पाया।।

बड़े हो स्वावलंबी बने हम 

देश के काम आए हम।।

प्रकाश का दीप क्यूँ ही जलाते

आगे बढ़ते जाए हम।। 

अध्यापिका ही आज है 

जो कल का नीवं रखती है।।

उनको करे हम सत-सत नमन 

जो पथ प्रकाशित करती है।।

Abhishek Srivastava, Hindi poem, 11 to 13 years
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