पांचवे दिन, पुतली लीलावती सिंहासन से प्रकट हुई और राजा भोज से बोली, “विराजने से पहले राजा विक्रमादित्य की निर्णय कुशलता और दान भावना की कथा सुन लो। तत्पश्चात तुम विराजने का निर्णय ले सकते हो”। एक बार राजा विक्रमादित्य…

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सिंहासन बत्तीसी – कहानी पुतली लीलावती की
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