Post Series: सिंहासन बत्तीसी

चौथे दिन राजा भोज आसन पर बैठने ही वाले थे कि पुतली कामकंदला प्रकट हुई और उनके सामने खड़े होकर बोली, “राजा भोज रुक जाओ। पहले राजा विक्रमादित्य की कहानी सुनो जिनमें अच्छे गुणों को पहचानने और उन्हें पुरस्कृत करने…

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सिंहासन बत्तीसी – कहानी पुतली कामकंदला की
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