Post Series: सिंहासन बत्तीसी

तीसरे दिन, राजदरबार में बैठे हुये सभी सम्मानीय लोगों के आगे रखे सिंहासन पर बैठने के लिए जब राजा भोज आगे बढ़े तभी सिंहासन में से चंद्रकला नामक तीसरी पुतली प्रकट हुई। वह राजा के आगे उनका रास्ता रोककर खड़ी…

Want to read this? Sign in or subscribe.

      Subscribe

सिंहासन बत्तीसी – कहानी तीसरी पुतली चन्द्रकला की
Rate this post

Loading...