एक बच्चा था, छोटा सा। नन्हा सा, भोला-भाला। उसका नाम सागर था। और वो था भी एकदम सागर जैसा। सागर की तरह बिल्कुल साफ़ दिल का। सागर की तरह बड़े दिल वाला।

खेलना उसे अच्छा लगता था। पर उससे भी ज़्यादा अच्छा उसे कुछ-कुछ और लगता था। वो क्या था? बच्चों के साथ मिलकर वो खेलता था। कभी-कभी खेलते-खेलते एकदम से खेल छोड़कर एक तरफ चला जाता। अगर उसे ज़मीन पर थोड़ा-सा भी कचरा पड़ा दिख जाता तो उसे अच्छा नहीं लगता था। वो जाता और उस कचरे को उठाता। उठाकर आस-पास कचरा डालने का डब्बा ढूँढता। फिर उसमें कचरा डालकर वापस खेलने आता।

Saaf Dil Wala Sagar

एक दिन वो अपने मम्मी-पापा के साथ घूमने जा रहा था। उसे सड़क के एक तरफ बिस्कुट का पैकेट पड़ा दिखा। उसने मम्मी-पापा से हाथ छुड़ाया। उधर गया। जाकर वो पैकेट उठाया और पास के कूड़ादान में डाला।

मम्मी ने पास आकर उससे पूछा, “बेटा तू ये क्या कर रहा है?” सागर बोला, “मम्मी मुझे स्कूल में टीचर ने बताया था कि अपना देश भारत है। और ये अपनी माँ है। माँ को साफ़ रखना चाहिए ना मम्मी?”

उसके मम्मी-पापा उसकी बात सुनकर खुश हुए। उन्हें अपने नन्हे से बच्चे पर गर्व हुआ। ५ साल का बच्चा इतना समझदार है! बड़ा होकर ये क्या बनेगा?

शब्दार्थ

  • कचरा – कूड़ा

अंग्रेज़ी में पढ़ें

John Stockton Slow Drag (Chris Zabriskie) / CC BY 4.0
साफ़ दिल वाला सागर
Average rating of 4.5 from 2 votes

This Post Has One Comment

Leave a Reply

Loading...