दो मित्र थे राम और श्याम । दोनों एक ही कक्षा में पढ़ते थे । राम और श्याम पढ़ाई के साथ-साथ खेल में भी रुचि रखते थे । उनकी फुटबॉल की टीम थी । राम श्याम से अच्छा खेलता था । खेल के मास्टर राम को बहुत प्यार करते थे । कुछ ही दिनों में फुटबॉल का मैच होना था । इसलिए शिक्षक ने टीम के कप्तान को चुनने का ऐलान किया । राम और श्याम दोनों ही कप्तान बनना चाहते थे ।

अगले दिन शिक्षक ने सभी लड़कों को फुटबॉल ट्रायल के लिए बुलाया और राम की मेहनत और लगन देखकर उसे कप्तान घोषित कर दिया । यह सुनकर श्याम ईष्र्या से भर गया और चुपचाप वहाँ से चला गया । वह राम से बदला लेने की योजना बनाने लगा । उसने राम की साइकिल की चेन खराब कर दी जिसके कारण राम दुर्घटनाग्रस्त हो गया । डॉक्टर ने जब बताया कि उसके पैर में फ्रैक्चर हुआ है और वह एक महीने तक बिस्तर से नहीं उठ पाएगा तब वह बहुत उदास हो गया । मास्टर जी भी बहुत दुखी हो गए और राम को सांत्वना देने लगे । राम का हालचाल पूछने उसके सभी मित्र अस्पताल आए परंतु श्याम नहीं आया । सभी इसी बात को लेकर चिंतित थे कि अब फुटबॉल मैच में कप्तानी कौन करेगा । राम ने कहा कि श्याम से अच्छा कप्तान और कौन बन सकता है,  उसे ही कप्तान बनाना चाहिए । सबने अपनी सहमति दे दी ।

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अगले दिन जब श्याम को इस बात का पता लगा तो वह बहुत हैरान हुआ कि राम ने उसका नाम सुझाया है ! वह अपनी करनी पर बहुत शर्मिंदा हुआ और राम से माफ़ी माँगने के लिए अस्पताल गया ।

श्याम ने राम से माफ़ी माँगी और ज़ोर-ज़ोर से रोने लगा । राम ने उसे संभालते हुए कहा कि टीम का कप्तान रोते हुए अच्छा नहीं लगता और राम ने श्याम को गले लगा लिया । राम ने मैच देखने आने का वादा किया ।

आखिरकार वह दिन आ गया जिसका सभी को बेसब्री से इंतजार था । श्याम की कप्तानी में टीम ने अच्छा प्रदर्शन किया और जीत गई । यह सुनकर राम बैसाखियों के सहारे खुशी से झूमता हुआ मैदान में आ गया । श्याम ने जीता हुआ कप और मैडल लाकर राम को दे दिए और कहा कि इसके असली हक़दार तुम हो । यह देखकर सभी की आँखों में खुशी के आँसू आ गए । दोनों सच्चे मित्र कप हाथ में उठाए घर की ओर चल दिए ।

सच्ची मित्रता
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