सक्षम ने मोहन से सच्ची दोस्ती का मतलब जाना।


मोहन एक बहुत ही होनहार छात्र था। बड़ों का आदर करना, अध्यापकों की बात मानना, सबसे अच्छे से बात करना, आदि उसमें सब गुण थे। वो एक बहुत गरीब परिवार से था।

सक्षम कक्षा में उसके साथ बैठता था। परंतु उसको मोहन से दोस्ती करना पसंद नहीं था। सक्षम की दोस्ती कुछ नए लड़कों से हुई। वह उनके साथ बहुत खुश था। वह न तो पढ़ाई करता, न अध्यापकों की बात सुनता। उसको नए लड़को के साथ रहना, खेलना अच्छा लगने लगा।

एक दिन वो स्कूल नहीं आया। वह अपने घर से पैसे लेकर अपने दोस्तों के साथ बाहर घूमने चला गया। उसने अगले दिन आकर अध्यापक से झूठ भी बोला कि वो बीमार था। मोहन ने उसे बहुत समझाया, पर उसने एक न सुनी।

फिर परीक्षा का समय आया, सक्षम के खराब नतीजे के कारण अध्यापक ने सक्षम के माता-पिता को बुलाया और सब बताया। सक्षम के माता पिता को ये सब सुन कर बहुत दुख हुआ। स्कूल में सक्षम को दाखिला देने से भी मना कर दिया।

तब सक्षम को एहसास हुआ कि उसने कितना गलत किया है। पर मोहन ने उसका साथ नहीं छोड़ा। वह पढ़ाई में उसकी सहायता करने लगा। सक्षम ने बहुत मन लगाकर मेहनत की। वह अच्छे अंकों से पास हुआ।

तब सक्षम की माँ ने उससे समझाया – सच्चा दोस्त वही है जो आपको सही राह दिखाए व मुसीबत पड़ने पर आपके साथ खड़ा रहे। दोस्ती में किसी भी भेद-भाव की कोई जगह नहीं होती।

Sacchi dosti

सक्षम को अपनी माँ की बात अच्छे से समझ आ गयी। अब सक्षम व मोहन अच्छे दोस्त बन गए। वह स्कूल में पढ़ाई के साथ-साथ अन्य कई प्रतियोगतायों में इनाम भी जीत कर आने लगे।

शब्दार्थ:

  • होनहार – बुद्धिमान
  • भेद-भाव – अंतर

नैतिक मूल्य:

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सच्ची दोस्ती
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