प्राचीन काल की कथा हैं। एक ऋषि के आश्रम में सौ विद्यार्थी विद्यासम्पादन कर रहे थे। गुरु सिखा रहे थे, शिष्य सिख रहे थे। शिष्यों का अध्ययन समाप्त होने के बाद दीक्षांत समारंभ में शिष्यों ने अपने गुरु को गुरुदक्षिणा…

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व्यर्थ वस्तू
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