गगन और मगन दोनों बड़े अच्छे दोस्त थे। दोनों साथ साथ टहलते हुए विद्यालय जाते थे। रोज नई बातों से रास्ता कट जाता था। एक दिन गगन बोला, “कल तीन साल बाद, मेरे दादा जी आये। बोले – अरे तू तो बहुत…

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विक्कु बने विवेकानंद
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