न है भिन्न अंग तुम्हारे, न हो अलग तुम किसी से, मेरे जैसा ही ख़ून दौड़े जिस्म में तुम्हारे वही हाथ, आँख, नाक और कान भी करे इशारे नहीं हो तुम कोई दूसरे, हम सब है एक जैसे आँख बंद…

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विकलांग नहीं, हमारे जैसे हो तुम
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