फुलवारी ने कठिन परिसतिथियों में भी शिक्षा प्राप्त करी। उसकी लगन देखकर उसके चाहने वालों ने उसकी मदद की।  एक सज्जन ने आकर पूछा, “एक माला कितने की है?” फूल बेचने वाली बालिका ने पूछा, “कौनसी बाबूजी? गुलाब की, गेंदे…

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लगन रंग लायी
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