एक राह था मेरा बचपन तब आता था पसंद सबको मेरा नटखटपन जब थी मैं छोटी, सब कहते थे मुझे प्यार में मोटी तब थी मैं अच्छी, नहीं लगती मैं अब किसी को सच्ची तब मैं ऐसे नाचती थी जैसे…

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राह और बचपन
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