जैसे एक राष्ट्रीय ध्वज किसी भी देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, वैसे ही राष्ट्र गान भी है। शब्दकोश में ‘गान’ शब्द का अर्थ है, आनंद और प्रशंसा का भजन। यह एक रागयुक्त रचना है जिसमें पवित्र और नैतिक शब्द हैं। दुनिया के सभी देशों के राष्ट्र गान, एकता और देशभक्ति को बढ़ावा देते हैं। राष्ट्र गान निस्संदेह ही किसी भी देश की स्वतंत्रता और पहचान का एक बहुत ही महत्वपूर्ण पहलू है।

दिलचस्प बात यह है, कि किसी देश को राष्ट्र गान अपनाने के लिए कोई अंतर्राष्ट्रीय कानून नहीं है। फिर भी प्रत्येक देश औपचारिक रूप से एक उपयुक्त राष्ट्र गान को अपना लेता है।

राष्ट्र गान को अपनाने का प्रचलन १४वीं सदी से शुरू हुआ था। इतिहास में दर्ज पहला राष्ट्र गान डच देश का है जो १५६८ में अपनाया गया था। हालाँकि, अधिकारिक तौर पर अपनाया गया पहला राष्ट्र गान स्पेनिश गान है जो १७७० में अपनाया गया था।

national anthem

विभिन्न देशों के राष्ट्र गान अलग-अलग भाषाओं में हैं, पर वे समान बातें निरूपित करते हैं और उनका उद्देश्य एक ही है – अपने नागरिकों के मन में देशभक्ति और राष्ट्रवाद की भावना को पैदा करना।

राष्ट्र गान एक कहानी दर्शाते हैं, उस देश के स्वतंत्रता संग्राम की और युद्ध की। और अधिकतर यह, अपने देश की महिमा के लिए खड़े होने और उसके लिए मर मिटने का संदेश भी देते हैं।

क्या आप जानते हैं, कि अधिकांश देशों के राष्ट्रगान एक गीत या एक कविता से विकसित हुए हैं? उदाहरण के लिए, अमेरिका का राष्ट्र गान – ‘तारों भरा बैनर’ १९वीं सदी में एक कविता के रूप में लिखा गया था। बाद में इसे छोटा किया गया और एक पुरानी अंग्रेजी गीत की धुन इसमें डाली गई।

कुछ राष्ट्र गान काफी लंबे हैं, और उन्हें गाने में एक घंटे से अधिक समय लगता है। ग्रीस का राष्ट्र गान सबसे लंबा है जिसमें १५८ पद हैं। इसके विपरीत, जापान का राष्ट्र गान सबसे छोटा है जिसमें केवल चार लाइन हैं।

भारत का राष्ट्र गान ‘जन-गण-मन’ मूल रूप से रवींद्र नाथ टैगोर द्वारा लिखित एक बंगाली गीत था। गीत में पांच छंद हैं, किन्तु गीत का केवल पहला छंद ही राष्ट्र गान के रूप में अपनाया गया है।

इसका हिन्दी में अनुवाद किया गया और २४ जनवरी, १९५० को भारत के राष्ट्र गान के रूप में संविधान-सभा द्वारा अपनाया गया। राष्ट्र गान का अंग्रेज़ी में अनुवाद भी किया गया। भारतीय राष्ट्र गान के विधिवत गायन में ५२ सेकंड लगते हैं।

आईये राष्ट्र गान के शब्दों पर नज़र डालें:

जन-गण-मन अधिनायक जय हे,

भारत-भाग्य-विधाता।

पंजाब, सिंध, गुजरात, मराठा,

द्राविण उत्कल बंग।

विन्ध्य, हिमाचल, यमुना, गंगा,

उच्छल जलधि तरंग।

तव शुभ नामे जागे,

तव शुभ आशीष मांगे;

गाहे तब जय गाथा।

जन-गण मंगलदायक जय हे

भारत भाग्य विधाता।

जय हे, जय हे, जय हे,

जय जय जय, जय हे।

ये स्तुति, निष्ठा और भक्ति के प्रबल शब्द हैं और सभी को प्रेरित करते हैं। राष्ट्र गान हमारे देश के लिए एक अर्थपूर्ण और प्रतिष्ठित स्थान रखता है।

यह हमेशा विशेष अवसरों पर गाया जाता है। राष्ट्र गान गाते समय सभी नागरिक ध्यान की अवस्था में खड़े होते हैं, जो कि आदर और सम्मान का प्रतीक है। भारत सरकार समय-समय पर राष्ट्र गान की गरिमा और सम्मान को सुनिश्चित रखने के लिए निर्देश ज़ारी करती है।

हाल ही में, राष्ट्र गान पर काफी विवाद उत्पन्न हुआ। यह कहा गया कि यह गीत वास्तव में इंग्लैंड के राजा, जॉर्ज पंचम की प्रशंसा में लिखा गया था। उस समय के मीडिया विवरणों के अनुसार यह गीत राजा की भारत यात्रा के समय लिखा गया था। इस प्रकार, तर्क है कि यह गीत राजा की प्रशंसा में लिखा गया था, न कि मातृभूमि की प्रशंसा में।

हालाँकि, इस बात का ऐतिहासिक तथ्य उस समय की कुछ मीडिया रिपोर्ट ही हैं। अतः लोगों की मांग है कि हमारा राष्ट्र गान बदला जाए या फिर इसके स्थान पर हमारे राष्ट्र गीत – ‘वंदे मातरम्’ का प्रयोग किया जाए।

इसके विपरीत, एक तर्क यह भी है कि राष्ट्र गान सही मायने में भारत की अनेकता की स्तिथि को दर्शाता है। यह पंजाब, गुजरात, महाराष्ट्र, बंगाल, ओडिशा और दक्षिण तक पूरे देश की बात करता है। यह हमारी पवित्र गंगा और यमुना का उल्लेख करता है। यह भारत के भाग्य की बात करता है।

यह बहस अब अनंत बन चुकी है। किन्तु, यह किसी भी व्यक्ति, समूह या समुदाय को राष्ट्र गान का अनादर करने का अधिकार नहीं देती।

हमें यह याद रखना चाहिए कि चाहे गीत किसी राजा या मातृभूमि की प्रशंसा में लिखा गया हो, इसे औपचारिक रूप से हमारे देश के राष्ट्रगान के रूप में अपनाया गया है और यह दुनिया भर में फैले लाखों भारतीयों को प्रेरित कर रहा है।

यह अद्भुत बात है, कि कैसे एक गीत कुछ ही सेकंड में पूरे देश को एक साथ बाँध सकता है। इसलिए, आईये हम यह शपथ लें कि हम हमेशा राष्ट्र गान की रक्षा करेंगे, इसका संरक्षण करेंगे और हर समय इसकी गरिमा का सम्मान करेंगे।

अंग्रेज़ी में पढे

राष्ट्र गान
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