बहुत देर से मैं यहाँ बैठी, देखो कितनी सुंदर राखी लायी, बढ़ी जंचेगी तुम्हारी कलाई, और मीठा भी पसंद का ले आयी, पर एक बात ध्यान से सुन ले भाई, पहले चाहिये खूब पैसे मुझको, तभी यह राखी बाँधूँगी तुमको,…

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रक्षाबंधन
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