मैं चुलबुली,चंचल,मतवाली,मनचली सी

मत बाँधो मुझे,मत बाँधो मुझे

इन दुनिया के बंधनों मे,

मैं जी न सकूँगी,मैं जी न सकूँगी

खुले आसमान की आदत है मुझे,

अपनी तरह जीने का तरीक़ा है

भरोसा करो मुझ पर,कुछ ग़लत नहीं करूँगी,

मत रोको मुझे,मैं जी न सकूँगी 

सभी की सुनूँगी पर अपने मन की करूँगी ,

क्योंकि मुझे पता है मैं कुछ ग़लत नहीं करूँगी 

मेरी भी कुछ हस्ती है,कुछ करने का जज़्बा है,

मत रोको-मत टोको मुझे,मैं जी न सकूँगी 

मत बदलो मेरी चाल को,एहसास को,

मेरी पहचान इसी से है,मेरी भी सुनो

नहीं कर सकती अपने को अपने से अलग!!!!

मुझे जीने दो…मुझे जीने दो…

मैं मतवाली चुलबुली चंचल
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