First published in September 2016


कल से गर्मी की छुट्टियाँ होने वाली थीं। कनिका बहुत उत्साहित थी। उसने इन गर्मी की छुट्टियों में कुछ ख़ास करने की सोच रखी थी। वह जानती थी कि अब वह नाइन्थ क्लास में आ गयी है, इसलिए वह पढाई में और अधिक व्यस्त होती चली जायेगी। इसलिए उसने सोच रखा था कि वह इन छुट्टियों में कुछ ऐसा करेगी, जो अभी तक किसी ने न किया हो। ऐसा कुछ, कि देखने वाले देखते रह जाएं। सोचते सोचते उसे एक आईडिया सूझ गया।

उसने मम्मी से पूछकर एक बेकरी क्लास में दाखिला ले लिया। उसके घर में माइक्रोवेव था, किन्तु वह बस खाना गरम करने के काम आता था, क्योंकि घर में कोई केक बनाना जानता ही नहीं था। उसने बेकरी क्लास में तरह तरह के केक बनाने सीखे। जब उसने घर में वे केक बनाये, तो सब लोगों ने उसकी खूब तारीफ की और उसे खूब शाबाशी भी दी। एक दिन उसने बिना अंडे का केक बनाकर दादी माँ को खिलाया, तो वे बहुत खुश हुईं। अब क्या था, अब तो धीरे धीरे घर परिवार में, नाते रिश्तेदारी में, आसपड़ोस में और सहेलियों के बीच में उसके केक बहुत प्रसिद्द हो गए। कनिका को केक की गार्निशिंग करने (सजाने में) बहुत मज़ा आता था। अब वह अपने मन से भी नए नए डिज़ाइन से केक की गार्निशिंग करती।

एक दिन वह अपनी सहेली माही के घर गयी। माही ने उससे कहा था कि वह उसे बहुत खास चीज़ दिखाएगी। कनिका उसके घर पहुँचते ही बोली, “माही क्या है तेरी खास चीज़? जल्दी दिखा।”

माही अपनी दीदी से उनका मोबाइल फ़ोन ले आई। उसमें उसने गूगल पर ‘केक इमेजेज़’ लिखकर सर्च किया तो बहुत सुन्दर-सुन्दर केक की फोटो दिखने लगीं। कनिका एकदम खुश हो गयी देखकर। माही आगे दिखाती गयी। अनगिनत केक, एक से बढ़कर एक सुन्दर। वे तो कोई कलाकृति ज्यादा लग रहे थे। कनिका और माही यह सोचकर हैरान थीं कि कोई इतने सुन्दर केक को खाने की हिम्मत कैसे कर पाता होगा। थोड़ी देर तो कनिका ने खुश होकर देखा, फिर अचानक से उसे जाने क्या हुआ कि वह बोली “छोड़ माही! मुझे और नहीं देखने।”

“क्यों”? माही आश्चर्य से बोली।

“मैं तो सोचती थी कि मेरे जैसे सुन्दर केक कोई नहीं बना पायेगा। धीरे धीरे मेरा दुनिया में नाम हो जायेगा। जब एक से बढ़कर एक केक गूगल पर कोई भी देख सकता है, और बनाने वाले का नाम भी पता नहीं चलता तो फिर इसमें इतनी मेहनत करनी तो बेकार है।” ऐसा कहकर कनिका ने मोबाइल फोन माही को थमाया और उल्टे पैरों घर वापिस आ गयी।

अब कनिका ने केक बनाना बिल्कुल ही छोड़ दिया। यहाँ तक कि एक दिन जब बुआ घर आने वाली थीं और मम्मी ने उसे केक बनाने के लिए कहा, तब भी उसने केक नहीं बनाया। मम्मी परेशान होकर कहने लगीं “कैसी अजीब लड़की है यह! इसे समझना या समझाना दोनों ही बेकार हैं।”

कुछ दिन बाद उसके मामा मामी घर आये। मामा का बेटा वरुण कनिका के बराबर का ही है। वह एक साल से कत्थक नृत्य सीख रहा है।

उसने कत्थक करके दिखाया तो सबने उसकी खूब तारीफ की। पर कनिका मुँह बनाकर बोली, “कत्थक तो बहुत सारे लोग कर लेते हैं, टीवी पर इतने सारे डाँस शो आते हैं, उसमें भी हर कोई हर तरह का डाँस कर लेता है। ऐसी चीज़ करने का क्या फायदा। करो तो कोई ऐसा काम करो, जिसे किसी ने न किया हो।”

कनिका की बात सुनकर वरुण का मुँह उतर गया। मामी-मामा भी चुप से हो गए। यह तो तय था कि उन्हें कनिका की बात अच्छी नहीं लगी थी। मम्मी ने कनिका को समझाने की कोशिश की मगर कनिका उल्टे जवाब देने लग गयी। मम्मी की समझ में नहीं आ रहा था कि उसका यह व्यवहार कैसे ठीक किया जाये।

कुछ दिन बाद उसकी एक सहेली खुशबू ने उसे और कुछ और सहेलियों को अपने जन्मदिन पर अपने घर बुलाया। खुशबू ने गुलाबी रंग की एक सुन्दर सी ड्रैस पहन रखी थी, जिसमें वह बहुत प्यारी लग रही थी। जब खुशबू ने बताया कि वह ड्रैस उसने खुद सिली है, तो सबने उसकी बहुत तारीफ की। पर कनिका बोली, “ऐसी ड्रैस तो मेन मार्केट में आराम से मिल जाती हैं। वहाँ बड़े अच्छे बुटीक हैं, जिसे ड्रैस चाहिए वह मेरे साथ चले, मैं उसे एक से बढ़कर एक ड्रैस दिखा सकती हूँ।” कोई और लड़की होती तो कनिका से यह कहकर लड़ बैठती कि कनिका उससे चिढ़ रही है। पर खुशबू बहुत शान्त और समझदार लड़की थी। वह बोली, “हाँ, मैं जानती हूँ कि बुटीक में सुन्दर-सुन्दर ड्रैस आराम से मिल जाएँगी। पर इस ड्रैस की खास बात यह है कि इसे मैंने खुद सिला है। मैंने अपनी मम्मी की सहेली के बुटीक में जाकर इसलिए सिलाई सीखी कि मुझे सिलाई करना अच्छा लगता है। मेरी मम्मी भी मुझे ड्रैस खरीदवा देतीं पर अपने हाथ से ड्रैस सिलकर मुझे जो सुकून मिलता है, वह मुझे खरीदी हुई ड्रैस से नहीं मिल सकता था।”

सब लोग चुप होकर खुशबू की बात सुन रहे थे। उसके अपनी बात पूरी कर लेने पर सबने उसके लिए तालियाँ बजाईं।

कनिका घर लौटकर भी खुशबू की बात पर विचार करती रही। उसे लगा कि आज उसने एक बड़ी अनमोल बात सीखी है। हमें कोई काम यह सोचकर नहीं करना चाहिए कि दुनिया में सिर्फ हम ही इसे कर सकते हैं। हमें वह काम करना चाहिए, जो हमारे मन को सुकून दे सके। कोई रचनात्मक काम करके हमें बड़ी शांति मिलती है, और आगे बढ़ने की प्रेरणा भी। ऐसा करने से हमारे अंदर आत्म-विश्वास आता है। अब कनिका ने सोच लिया था कि आज से वह फिर से केक बनाकर सबको खिलायेगी और इंटरनेट पर नए नए केक सजाने के तरीके भी सीखेगी।

आज के युग में जब टीवी इंटरनेट जैसे माध्यम हैं, जो हमें किसी भी क्षेत्र में होने वाले अच्छे से अच्छे काम दिखा सकते हैं, तो हमें उसका लाभ उठाना चाहिए, उससे प्रेरणा लेकर आगे बढ़ना चाहिए, न कि यह देखकर निराश होना चाहिए कि इस क्षेत्र में तो बहुत काम हो चुका है।

शब्दार्थ

  • कलाकृति – ऐसी भौतिक वस्तु को कहते हैं जिनका कला या सौन्दर्य की दृष्टि से मूल्य हो
  • मुँह उतर जाना – बुरा लग जाना या उदास हो जाना
मेरे जैसा कोई नहीं
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