माँ! मुझे कवियित्री बनना है, शब्दों में रस भरना है, रस, अलंकार, छंद से अपनी बातों को सजाना है, सुंदर प्रकृति की तारीफ़ में भी कुछ-कुछ कहना है, तितली, भौंरे, और चिड़ियों की चहचहाट, इन सब से अपनी कवितायों को…

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मुझे कवियित्री बनना है
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