First published in November 2016


पाँच वर्ष की मीठी बड़ी नटखट और चंचल थी। एक दिन मम्मी ने देखा कि मीठी काम वाली बाई की बेटी पूजा (जो उसी की उम्र की थी) को कुछ समझा रही है। वे रूककर सुनने लगीं।

पूजा के हाथ में छिला हुआ केला था। मीठी कह रही थी “देखो, तुम्हारे केले पर मक्खी बैठ रही है, उसे उड़ाओ। तुम्हें पता है मक्खी तमाम गन्दी चीजों पर बैठती है, फिर जब वह खाने की चीज़ों पर बैठती है तो उन पर भी गंदगी लग जाती है। तुम ऊपर से थोड़ा सा केला तोड़कर फेंक दो, नहीं तो तुम बीमार पड़ जाओगी और तुम्हें कड़वी कड़वी दवाइयाँ खानी पड़ेंगी”। उसने दोनों हाथ चलाकर और आँखें गोल-गोल घुमाकर ऐसे कहा कि पूजा ने झट से ऊपर से केले का एक टुकड़ा तोड़कर फर्श पर फेंक दिया।

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मीठी ने बड़े-बूढ़ों की तरह माथे पर हाथ लगाया और बोली, “ओफ़्फ़ोह! फर्श पर थोड़े ही फेंकते हैं! इसे उठाओ और डस्टबिन में डालकर आओ”। उसकी रौब से कही गयी बात का पूजा ने तुरंत पालन किया। मम्मी को यह देखकर हँसी आ गयी।

मम्मी ने उसे गोदी में उठाया और प्यार करते हुए कहा, “शाबाश मीठी, तुमने एकदम सही कहा”।

शब्दार्थ

  • तमाम – सब
  • रौब – बड़प्पन दिखाना
मीठी
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