“भैया मिट्ठू, भैया मिट्ठू!” ज़ोर-ज़ोर से भाई को पुकारती हुई टीना पार्क के उस कॉर्नर पर आयी, जहाँ उसका भाई परम अपने दोस्तों के साथ बैडमिंटन खेल रहा था।

टीना ने परम को छोटे बच्चों के कॉर्नर की तरफ ले जाकर दिखाया कि वहाँ एक तोते का बच्चा पेड़ की एक निचली डाली पर बैठा कभी इधर, कभी उधर फुदक रहा था। बच्चों के घेर लेने और शोर मचाने से वह घबराया हुआ सा लग रहा था। ऐसा लगता था कि उसने अभी ठीक से उड़ना नहीं सीखा था। पता नहीं वह यहाँ तक कैसे पहुँचा। परम ने यह सोचकर बच्चों को वहाँ से हटाया कि शायद मिट्ठू को वहाँ अकेला पाकर उसके साथी उसे अपने साथ ले जाएँ, पर ऐसा कुछ हुआ नहीं। दिन छुपने वाला था और बच्चे बूढ़े सभी पार्क से वापिस लौट रहे थे। परम ने अपनी जेब से रुमाल निकाला और बड़ी कोमलता से उसमें मिट्ठू को उठा लिया और घर ले चला। मिट्ठू पंख फड़फड़ाने की नाकाम कोशिश कर रहा था और टीना मिट्ठू को घर ले जाने की बात पर खुशी से चहक रही थी।

परम जानता था कि पड़ोस वाली आँटी के घर में एक पिंजरा बेकार पड़ा है। बहुत पहले उनके घर नन्ही चिड़ियाँ पली हुई थीं, उन्हीं का पिंजड़ा था यह।

वह आँटी से पिंजरा माँग लाया। लाकर उसे धोया और मिट्ठू को उसमें बिठा दिया। परम और टीना ने पिंजरे में मिट्ठू के लिए पानी, हरी मिर्च और कुछ दाने रख दिए।

वे दोनों उसका बड़ा खयाल रखते। टीना उसे मिट्ठू मिट्ठू बोलना सिखाती। दो चार दिन बाद मिट्ठू भी बोलने की कोशिश करने लगा था। परम जब स्कूल से आता तो उसका पिंजरा खोल देता। मिट्ठू झट से बाहर आ जाता और इधर उधर फुदकता रहता। कभी-कभी वह हल्का सा उड़कर इधर उधर बैठ जाता।

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टीना आजकल अपने खिलौनों से नहीं खेलती थी। उसका ज्यादा वक्त अब मिट्ठू के साथ निकलता था। उसने परम से पूछा कि वह मिट्ठू को पिंजरे से बाहर क्यों निकाल लेता है। परम ने कहा, “ताकि वह उड़ना सीख जाये”।

“फिर किसी दिन वह उड़कर दूर चला गया तो?”

“हाँ टीना, जब वह उड़ना सीख जायेगा तो वह और तोतों के साथ रहेगा, पेड़ पर”।

“नहीं, यह हमारा मिट्ठू है। हम इसे कहीं नहीं जाने देंगे,” टीना ने कहा।

परम ने उसे समझाया, “टीना, वह अपने साथियों के साथ ज्यादा खुश रहेगा”।

“तो हम तो उसे इतना प्यार करते हैं, अच्छी-अच्छी चीज़ें खाने को देते हैं, वह हमारे साथ भी खुश रहेगा”।

“नहीं टीना, अगर कोई तुम्हें कमरे में बंद कर दे और अच्छी-अच्छी चीजें खाने को दे तो क्या तुम खुश रहोगी?”

“नहीं भैया, मैं बहुत रोऊँगी”, टीना परेशान-सी होकर बोली।

“बस, इसीलिए हम भी इसे पिंजरे में बंद करके नहीं रखेंगे।”

“तो फिर आप इसे पिंजरे में क्यों बन्द कर देते हैं?”

“इसकी रक्षा करने के लिए”, परम ने कहा, “जब तक हम स्कूल या ट्यूशन में व्यस्त होते हैं, हम इस पर नज़र नहीं रख सकते। पापा ऑफिस चले जाते हैं। मम्मी घर के काम करती रहती हैं। मौका मिल जाये तो बिल्ली ही खा जायेगी इसे”।

“ओहो!” टीना को लगा कि उसके भैया कितने समझदार हैं।

मिट्ठू अपनी आज़ादी के वक्त थोड़ा थोड़ा उड़ने की कोशिश करता रहता। अब वह कमरे के बाहर आँगन में भी चला जाता था। धीरे धीरे उसकी उड़ान कुछ ऊँची भी होने लगी थी। एक दिन वह उड़कर आँगन के खम्भे पर बैठा और फिर आसमान में उड़ गया।

टीना परेशान होकर चिल्लाई, “भैया मिट्ठू!”

परम ने कहा, “टीना, उसको बाय कहो, आज वह अपनी दुनिया में जा रहा है”।

तब तक मिट्ठू आँखों से ओझल हो गया था।

टीना ने हाथ उठाकर उसे बाय बोला। अपने आँसू पोंछकर वह यह सोचकर मुस्कुरा दी कि उनका मिट्ठू अब अपने साथियों के साथ आजादी की ज़िन्दगी जियेगा और खुश रहेगा।

शब्दार्थ:

  • फुदक – एक स्थान से दूसरे स्थान जाने का भाव
  • झट से – बहुत तेज़ी से
मिट्ठू
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