अमन (मुसलमान), गगन (हिन्दू) और एडन (ईसाई) के बीच गहरी दोस्ती थी। कोई भी रुकावट उनकी दोस्ती को डिगा नहीं सकी थी, चाहे वह धर्म की हो, चाहे खान-पान की, चाहे उनके माता-पिता की हो, चाहे अमीरी-गरीबी की। कक्षा में पहला, दूसरा और तीसरा स्थान सदैव इन तीनों का ही आता था। इनका लक्ष्य भी एक ही था – अपना जीवन सभी की सेवा में लगा देना। जब, जहाँ, जिसे, जैसी भी जरूरत पड़ जाये, तीनों पहुँच जाते थे। तीनों को गीता, रामायण, कुरान, बाइबल केवल याद ही नहीं थीं, अपितु इन ग्रंथों के अनुसार उनका आचरण था।

एक बार हिन्दू, मुसलमान और ईसाईयों के बीच दंगे छिड़ गए। सब एक-दूसरे को मार-काटने पर उतारू हो गए। इन तीनों का मन इस वातावरण से बहुत दुखी हो गया। माता-पिता ने घर से निकलने के लिए भी मना कर रखा था। लेकिन एक दिन ये तीनों एक जगह एकत्रित हुए। तीनों ने मिलकर एक योजना बनाई।

फिर अमन (मुसलमान) ईसाई समुदाय के प्रमुख पादरी के घर गया। उसकी वेशभूषा बिल्कुल ईसाईयों की तरह थी। कोट-पैंट, टाई, टोपी, जूते आदि पहना हुआ वह एकदम ईसाई ही लग रहा था। उसने चर्च के पास ही बने पादरी के कमरे का दरवाजा खटखटाया। अन्दर से एक ४०-४५ वर्षीय पादरी बाहर आये।

पादरी ने दरवाजा खोलकर कहा, “Yes, my son, बोलो क्या काम है?” अमन ने कहा, “फ़ादर मैं आपसे कुछ बात करना चाहता हूँ। क्या मैं अन्दर आ सकता हूँ?” फ़ादर ने कहा, “Welcome, आओ।” दोनों अन्दर आये। फ़ादर ने पूछा, “बोलो क्या काम है? और नाम क्या है तुम्हारा?” अमन ने जवाब दिया, “नाम मैं अपनी बात पूरी होने पर बताना चाहता हूँ फ़ादर। और काम, जो ये दंगे हो रहे हैं सभी के बीच जो झगड़े हो रहे हैं, उससे सम्बन्धित बात करनी है। I want to talk to you related to this matter” फ़ादर ने कहा, “Yes, say whatever you want, बोलो क्या बात है। इन हिन्दू और मुसलमान लोगों ने परेशान कर रखा है।”

अमन ने कहा, “हाँ फ़ादर, लेकिन मैं इसी का दूसरा पहलू आपको दिखाना चाहता हूँ। मैं आपसे छोटा हूँ, फिर भी कुछ कहना चाहता हूँ।” ऐसा कहते हुए उसने फ़ादर के सामने घुटनों के बल बैठकर उनका हाथ चूम लिया। फ़ादर ने खुश होकर उसके सिर पर हाथ फेरते हुए कहा, “बोलो, क्या कहना चाहते हो।” अमन बोला, “जीसस ने कहा है, ‘मैं तुम लोगों को एक नयी आज्ञा देता हूँ, तुम एक-दूसरे को प्यार करो, जिस प्रकार मैंने तुम लोगों को प्यार किया। यदि तुम एक-दूसरे को प्यार करोगे तो उसी से सब जान जायेंगे कि तुम मेरे शिष्य हो’।” फ़ादर ने गहरी साँस छोड़ते हुए कहा, “हाँ, जीसस ने यही तो कहा है, फिर भी कहाँ कोई मानता है।”

Mann Udhar Hai Toh Poori Duniya Apni Hai

अमन ने कहा, “लेकिन फ़ादर हम भी तो नहीं मान रहे।” फ़ादर ने कुछ आश्चर्य से अमन की ओर देखते हुए पूछा, “तुम चाहते क्या हो?” अमन एक कागज़ निकालते हुए बोला, “फ़ादर मैं इस पर आपके सिग्नेचर चाहता हूँ। इसमें लिखा है कि अगर हिन्दू और मुसलमान दंगे बंद कर दें, तो ईसाई अपनी तरफ से पहल नहीं करेंगे।”

फ़ादर के माथे पर कुछ लकीरें खिंच आयीं। उन्होंने पूछा, “क्या नाम है तुम्हारा?” अमन घुटनों के बल बैठकर बोला, “मेरा नाम अमन है, मैं जन्म से मुसलमान हूँ, लेकिन इससे पहले इन्सान हूँ। और इंसानों की ज़िन्दगी चाहता हूँ। मेरे रहन-सहन, बोल-चाल किसी से भी आपको नहीं पता चल पाया कि मैं ईसाई नहीं हूँ, फिर ये झगड़े क्यों? हम यीशु को कष्ट क्यों दे रहे हैं?”

फ़ादर ने बिना कुछ और कहे अमन को उठाया और उस पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए।

उधर गगन एक मुसलमानी वेश बनाकर मौलवी साहब के पास गया, जो इस समय मुसलमानों का संचालन कर रहे थे। अन्दर जाकर उसने सिर झुकाकर हाथ से सलाम करते हुए कहा, “सलाम वालेक्कुम”। मौलवी साहब ने जवाब दिया, “वालेक्कुम अस्लाम। कौन हो तुम बरखुरदार, क्या नाम है और कैसे आये हो?” गगन ने कहा, “मैं आपसे बात करने आया हूँ। ये जो दंगे छिड़े हुए हैं उस बारे में।” मौलवी साहब ने उसे ऊपर से नीचे तक देखते हुए कहा, “किसने भेजा है?” गगन ने बिना डरे जवाब दिया, “मेरी अपनी ही रूह ने।” मौलवी साहब बोले, “बहुत समझदार लगते हो।” गगन बोला, “समझदार तो तब होता जब इन सब झगड़ों को खत्म करवा पाता। बुरा ना मानना मौलवी साहब, लेकिन कुरान में ही कहा गया है कि अच्छा काम करने में एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा करो।” मौलवी साहब ने कहा, “तुम क्या कहना चाहते हो?”

गगन ने उन्हें भी वैसा ही पत्र दिखाया जिसमें लिखा था कि अगर हिन्दू और ईसाई दंगे ना करें, तो मुसलमान पहल नहीं करेंगे। गगन ने अपना नाम और परिचय भी उन्हें बताया। मौलवी साहब को उससे मिलकर ख़ुशी हुई और उन्होंने उस पर हस्ताक्षर कर दिए।

उनका तीसरा साथी एडन, हिन्दुओं की वेशभूषा में हिन्दुओं के प्रमुख पुजारी के यहाँ गया और उनसे भी इसी तरह बात करते हुए उसने कहा, “ऐसा कहा गया है कि वासुदेवः सर्वं – सभी में ईश्वर का वास है, फिर हम किसपर हाथ उठा रहे हैं, किसे मार रहे हैं?” इस प्रकार बातें करके उसने उस पत्र पर उनसे भी हस्ताक्षर करवाए। इसमें लिखा था कि अगर मुसलमान और ईसाई दंगे ना करें तो हिन्दू पहल नहीं करेंगे।” पुजारी जी को एडन से मिलकर बहुत ख़ुशी हुई।

फिर तीनों दोस्त एक जगह एकत्रित हुए और सभी समाचार पत्रों के पास जाकर, वो तीनों पत्र हस्ताक्षर सहित छापने को कहा। अगले दिन सभी समाचार पत्रों में यह खबर छपी। सभी ने इसे पढ़ा और दंगे बंद हो गए।

मुख्यमंत्री ने इन तीनों दोस्तों को एक विशाल समारोह में बुलाकर सम्मानित किया और कहा, “जो काम पुलिस नहीं कर सकी, उसे तुम तीन बच्चों ने कर दिखाया। जो काम बन्दूक नहीं कर सकी, उसे तुमने अपने आचरण से कर दिया। देश को तुम जैसे नौजवानों पर गर्व है।”

तीनों के माता-पिता को भी बहुत गर्व हुआ कि उनके बच्चे इतने होनहार हैं। साथ ही तीनों धर्मों के पादरी, पुजारी और मौलवी साहब ने भी इन बच्चों के लिए दुआ की, आशीर्वाद दिया, प्रार्थना की।

शब्दार्थ

  • अपितु – लेकिन
  • एकत्रित होना – इकठ्ठा होना
  • संचालन – चलाना
Sunset (Kai Engel) / CC BY 4.0
मन उदार है तो पूरी दुनियाँ अपनी है
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