आदित्य बिस्तर पर उल्टा लेटा हुआ सुबक-सुबक कर रो रहा था। तभी दादा जी शाम की सैर करने अपने कमरे से निकले। आदित्य के रोने की आवाज़ सुनकर वे इधर चले आए। बोले, “अरे आदित्य! आज खेलने नहीं जाना? पार्क…

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मनमानी
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