First published in November 2016 edition.


इस बार विद्यालय में प्रथम एवं द्वितीय कक्षा के बच्चों के माता पिता को सूचना मिली थी – आप छुट्टियों में बच्चों को कहीं भी घुमाए, लेकिन उन्हें एक बार चिड़ियाघर ज़रूर घुमाए।

बच्चे उत्साहित हो विद्यालय आए।

दीदी ने पूछा, “कैसा लगा चिड़ियाघर घूमना?”

“बहुत अच्छा!”, सभी उत्साहित हो कर चीखे।

“अच्छा, अब सबको बारी बारी से बताना है। तुम्हें कौन सा जानवर सबसे चालाक और बहादुर लगा?”, दीदी ने प्रश्न पूछा।

शुरुआत शालू से हुई, “मुझे तो हाथी सबसे बहादुर और चालाक लगा। क्योंकि वो हमेशा झुंड में रहते हैं। उन्हें देख कर शेर भी भाग जाता है।”

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जगत बोला, “दीदी मुझे तो बंदर सबसे बहादुर और चालाक लगा। उसे कोई पकड़ ही नहीं पाता है।”

अनूप बोला, “दीदी शेर से ज़्यादा बहादुर कोई नहीं। उसकी एक दहाड़ से सब भाग जाते है।”

ऐसे ही किसी को चिड़िया, नीलगाय, भालू, हिरण आदि में चालाकी और बहादुरी के गुण लगे।

अब अनंमए की बारी आई, “दीदी, कोई जानवर किसी से डरता है, कोई किसी से। लेकिन मुझे तो सबसे बहादुर और चालाक मच्छर लगता है। वो सबको काट सकता है, कोई उसे नहीं काट सकता! वो किसी भी जानवर से नहीं डरता है।”

दीदी बोली, “वो तो ठीक है, लेकिन मैं तो चिड़ियाघर के जानवरों के बारे में पूछ रही थी”।

अनंमए बोला, “दीदी वहां तो बहुत मच्छर थे!”

सारी कक्षा ज़ोर ज़ोर से हंसने लगी।

शब्दार्थ

  • उत्साहित – खुशी का आभास
  • झुंड – इकट्ठे
मच्छर – महान
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