रांची शहर में गर्मियों की एक सुंदर सुबह का दिन था। सूरज की रोशनी ओस की बूंदों पर पड़ रही थी, जिससे वे हीरे की तरह चमक रहीं थीं। पक्षी मधुर स्वर से चहक रहे थे।

और गुप्ता परिवार में, चाय की महक हवा में भरी हुई थी।

“मंजू गुप्ता! उठो! सुबह के ७ बज चुके हैं!” रसोई से मंजू की माँ ने आवाज़ दी।

“अच्छा माँ!” मंजू ने अपने बिस्तर से बाहर निकलते हुए कहा और अपनी चप्पल में पैर डाले।

वह अपने माता-पिता के पास दौड़ी और उनसे लिपट गई।

“गुड मॉर्निंग, माँ! गुड मॉर्निंग, पापा!” उसने कहा।

“गुड मॉर्निंग, मेरी प्यारी बेटी,” उसकी माँ ने उसे गले लगाते हुए कहा।

“माँ क्या मैं बाहर से समाचार पत्र उठा लाऊं?” उसने पूछा।

“हाँ जाओ ले आओ, अब तक तो आ गया होगा,” माँ ने उत्तर दिया।

“और यह कालू को दे दो, वह भूखा होगा” उन्होंने मंजू को दूध का एक पैकेट, उस छोटे पिल्ले के लिए देते हुए कहा जो कि घर के बाहर सड़क के कोने में रहता था।

जैस ही मंजू गेट के पास पहुंची, उसे एक कुत्ते के चिल्लाने की आवाज़ आई जैसे कि वह मदद के लिए रो रहा हो।

घर से निकलते ही जैसे ही वह सड़क पर मुड़ी, कुछ शैतान बच्चों के गैंग को कालू को पत्थर मारते हुए देखकर हैरान रह गई।

वह वापस घर में जल्दी से घुसते हुए चिल्लाई, “पापा, जल्दी इधर आ कर मेरी मदद करो! कुछ शरारती लड़के कालू को पत्थर मार रहे हैं!”

उसके पिता एकदम से उठ गए और फ़ौरन उन शैतान लड़कों के सामने पहुँच गए।
“तुम लोग क्या कर रहे हो?” उन्होंने गुस्से भरी आवाज़ में बोला।
उनकी ज़ोरदार आवाज़ उन शैतान लड़कों को डराने के लिए पर्याप्त थी। वे तुरंत उस जगह से भाग गए।

मंजू पिल्ले की मदद के लिए जल्दी से पहुंची।

“इसका खून बह रहा है, पापा!” उसने रोते हुए कहा।

“चिंता मत करो, मंजू। हम इसे अभी पशु चिकित्सक के पास ले जाते हैं। वह इसकी मरहम पट्टी कर देंगी,” उन्होंने कहा।

“ओह,” उसने अपने आँसू पोंछते हुए कहा। “एक पशु चितिक्सक क्या करता है, पापा?”

“पशु चितिक्सक नहीं, उन्हें पशु चिकित्सक कहते हैं, मंजू। इंग्लिश में वेटेरिनेरियन। सिर्फ वेट भी कह सकते हैं। वे जानवरों की देखभाल करते हैं। वे पशुओं के डॉक्टर होते हैं” उन्होंने कार की तरफ जाते हुए मंजू को समझाया।

“क्या वह कालू को ठीक कर देगा?” उसने कार में बैठते हुए पूछा।

“जिस पशु चिकित्सक के पास हम जा रहे हैं वह एक महिला हैं, मंजू। लेकिन हाँ, वह कालू को स्वस्थ करने में हमारी मदद करेंगी,” मंजू के पिता ने उत्तर दिया और पशु चिकित्सक के क्लिनिक की ओर गाड़ी चलाना शुरू कर दिया।

मंजू ने अपनी गोद में बैठे हुए कालू की आंखों में देखा और वह सोचने लगी कि कैसे कोई किसी अन्य प्राणी के प्रति इतना असंवेदनशील हो सकता है।

उसने अपनी डिजिटल कलाई घड़ी पर पांच मिनट का अलार्म लगाया और इस बारे में सोचा।

अलार्म बंद हो गया। पर उसे यह बात समझ नहीं आई।

लेकिन उस पल, उसने यह कसम खाई कि जब भी वह ऐसी स्थिति फिर से देखेगी, वह तुरंत आवाज़ उठाएगी और ऐसे शैतान बच्चों को उनके बुरे कामों की सज़ा दिलवाएगी।

अभी वह यह सब सोच विचार ही कर रही थी कि उसके पिताजी बोले, “ये देखो, हम क्लिनिक पहुँच गए हैं।”

उसने खिड़की से बाहर देखा, तो उसे एक बोर्ड पर लिखा दिखाई दिया ‘पशु चिकित्सा क्लिनिक, कुत्ते की देखभाल में विशेषज्ञता’

वह कालू को संभाल कर क्लिनिक में ले गई।

एकदम सुबह का समय था, इसलिए स्वागत क्षेत्र में अपनी बारी आने की प्रतीक्षा करने की ज़रूरत नहीं थी। रिसेप्शनिस्ट ने सीधे चिकित्सक के केबिन में अन्दर जाने के लिए बोला।

“गुड मॉर्निंग, मिस्टर गुप्ता,” वेट ने कहा।

“गुड मॉर्निंग, डॉक्टर सरकार,” उन्होंने कहा।

“बताइये कैसे आना हुआ?” उन्होंने मंजू की ओर देखते हुए बोला।

“इसका नाम कालू है, डॉक्टर। हमने इसे सड़क पर खून में लथपथ पाया जब पापा ने उन गुंडे लड़कों को भगाया जो उसे पत्थरों से मार रहे थे” मंजू ने डॉक्टर को कुत्ते का बच्चा सौंपते हुए कहा।

मंजू ने देखा कि डॉक्टर कालू के घावों का ध्यान से निरीक्षण कर रहीं हैं। वह उसे सिंक पर ले गईं, उसके घावों से खून धोया और उसके बालों को पोंछ कर सुखा दिया।

फिर वह दरवाजे के पास रखे लंबे रैक के पास गईं और उस पर से दवाइयों के तीन ट्यूब उठाए। उन्होंने कालू को मंजू को वापस देने से पहले कालू के शरीर पर जगह-जगह लगे घावों पर अलग-अलग मलहम लगाया और उसकी पट्टी कर दी।

“मैंने कालू के घावों पर पट्टी लगा दी है, मिस्टर गुप्ता। मैं आपको कुछ हफ़्ते इस की देखभाल करने की सलाह देना चाहूंगी,” कागज़ के एक टुकड़े पर कुछ लिखते हुए उन्होंने कहा।

“अगले दो सप्ताह के लिए कालू के दोपहर के भोजन के साथ इन गोलियों को मिला दें और फिर मेरे पास एक चेक अप के लिए इसे ले कर आ जाएं,” मिस्टर गुप्ता को परचा देते समय उन्होंने बोला।

“अगर तब तक इसके घाव पर्याप्त रूप से ठीक हो गए होंगे, तो हम कालू के लिए एक टीकाकरण योजना तैयार करेंगे,” उन्होंने मंजू की तरफ देखा और मुस्कुराते हुए कहा, “जो इसकी रोगों से रक्षा करेगा। लेकिन हम टीके तब तक नहीं लगा सकते जब तक कि इसके घाव ठीक न हो जाएं, क्योंकि इससे कालू की तबियत और बिगड़ सकती है,” उन्होंने मंजू से कहा।

“आपकी मदद के लिए धन्यवाद डॉक्टर!” मिस्टर गुप्ता ने कहा।

“यह मेरा काम था मिस्टर गुप्ता,” डॉक्टर ने मुस्कुराते हुए कहा।

“चलो मंजू, चलते हैं,” मंजू के पिता ने उसका हाथ पकड़ते हुए कहा।

दोनों ने पशु चिकित्सक के केबिन से बाहर आकर, रिसेप्शनिस्ट की मेज़ पर फ़ीस दी, फार्मेसी से कालू की दवा खरीदी और कार में आ कर बैठ गए।

जैसे ही वे घर पहुंचे उन्हें मंजू की माँ गेट पर ही खड़ी मिलीं।

“मैं हमेशा से एक कुत्ते को पालना चाहती थी पापा। क्या हम इसको पाल सकते हैं, माँ?” मंजू ने कार से कालू को ध्यानपूर्वक निकालते हुए पूछा।

“यकीनन पाल सकते हैं!” मंजू के माता पिता ने एक साथ ही उत्तर दिया।

“हुर्रे!” खुशी के साथ मंजू के मुँह से निकला।

“जैसे ही वह जाग जाए, उसे मेरे पास ले आना, ठीक है मंजू? उसका स्वास्थ्य ठीक करने के लिए हमें अच्छा खाना खिलाने की ज़रूरत है” उसकी माँ ने कहा।

“ठीक है, माँ,” उसने कहा, और कालू को गोद में लिए बगीचे में आम के पेड़ से लटके टायर स्विंग के पास पहुँच गई। वह कालू को धीरे-धीरे हिला रही थी जिससे कि वह ठीक से सोता रहे।

“वह वैसे भी जल्दी उठ जाती है,” मंजू के पिता बोले।

“और कालू के साथ खेलती और उसकी देखभाल भी पहले से करती ही थी,” उसकी माँ ने उत्तर दिया।

“मुझे लगता है कि कालू को पालने से मंजू अधिक ज़िम्मेदार बन जाएगी,” उसके पिता ने कहा।

“और अधिक दयालु भी,” उसकी माँ ने हामी भरते हुए अपनी बेटी की तरफ देखा जो कि कालू को गोदी में पकड़े हुए उसे एक लोरी सुना रही थी।

“वह तुम्हारे नक्शेकदम पर चल रही है, रीमा,” मंजू के पिता ने उसकी माँ को कहा, “लेकिन अभी उसको यह बात पता नहीं है,” मंजू के पिता का इशारा उस तथ्य की तरफ था कि मंजू की माँ पिछले एक दशक से पशु क्रूरता के खिलाफ स्थानीय प्रयासों का नेतृत्व कर रहीं थीं।

“पर मेरी तुलना में उसने ये काम जल्दी ही शुरू कर दिया है,” मंजू की माँ ने मुस्कुराते हुए कहा।

शब्दअर्थ:

  • असंवेदनशील – जिसके दिल में दया न हो
  • फार्मेसी – जहां दवाइयां मिलती हैं
  • टीके – वो इंजेक्शन जिनसे बीमारियों से बचाव होता है

अंग्रेज़ी में पढे

मंजू ने कालू को गुंडों से बचाया
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