परीक्षा के दिन नज़दीक आ रहे थे और भोलू के प्राण ऊपर नीचे होना शुरू हो गए थे। यह उसकी सबसे ज़रूरी परीक्षा थी। वह अब दसवीं कक्षा में था और इस साल उसको अच्छे अंकों से उत्तीर्ण होना था।…

Want to read this? Sign in or subscribe.

      Subscribe

भोलू का सच
Average rating of 5 from 1 vote

Loading...