अत्यंत व्यस्त इलाके के एक महत्वपूर्ण स्थान पर, एक व्यस्त उपमार्ग के बीचों बीच स्थित हम हमेशा सोचते रहे कि क्या हम कल जीवित रहेंगे। हमने अपनी पाँच साल की छोटी सी उम्र में हज़ारों कारों और वाहनों को असंख्य बार देखा है, जो कि अपनी तेज़ गति से हमें हमारी जड़ों तक हिला कर चले जाते हैं।

दो साल पहले की एक भयानक रात हमें याद है जब भारी बारिश हुई थी और उपमार्ग के एक तरफ की दीवार डह गई थी और हमारे चारों तरफ की ज़मीन पूरी तरह हिल गई थी। हम भाग्यशाली थे कि आधी रात में हुई इस उथल-पुथल से बच गए।

अगली सुबह जब हमने बहुत सारे मनुष्यों और मशीनों को अपने आस पास देखा तो हमें हमारे पूर्वजों द्वारा सुनाई गई कहानी याद आ गई जिसमें वे कहते थे कि अपने आस पास जब भी ऐसा कोलाहल देखो तो अपने अस्तित्व के लिए प्रार्थना करते रहो।

हम तीन पेड़ थे, एक-दूसरे से सिर्फ दस फुट के अंतराल पर खड़े हुए और हमारे मन में बहुत आशंकाएं हुईं जब भारी मशीनें  हमारे काफी पास आ गईं। सौभाग्यवश, थोड़ी ही देर में हम राहत की साँस ले सके, जब हमने एक वरिष्ठ अधिकारी को भारी उपकरणों को सड़क के दूसरी तरफ ले जाने का निर्देश देते हुए सुना।

The lucky trio

क्योंकि मैं दीवार के सबसे करीब था, उसने अपना कार्यालय मेरे पास ही लगाया था जिस तरफ का मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध था। जब वो मेरी तरफ देखता तो ऐसा प्रतीत होता था जैसे कि मेरे अस्तित्व को आश्वासन दे रहा हो।

मैंने अपने इस विचार को अपने परिवार के दूसरे दोस्तों के साथ साझा किया और हमने जीवन को सकारात्मक रूप से देखना शुरू कर दिया। जल्दी ही हमारे चारों तरफ चार फुट की ऊंचाई तक नरम मिट्टी डाली गई और एक दीवार लगा कर प्लास्टर किया गया जिससे कि हमें सहज रूप से बढ़ने के लिए पर्याप्त स्थान मिले।

किसी का इस बात पर शायद ध्यान भी नहीं गया लेकिन इससे हमें बहुत खुशी, आत्मविश्वास और जीवन शक्ति मिली और हम बिना डर के ऊपर की तरफ बढ़ रहे हैं। अब तो हम उपमार्ग के सबसे उपरी बिंदु तक पहुँच चुके हैं। और हम उन सभी हरित क्रान्ति की भावनाओं से भरे लोगों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हैं कि उन्होंने हमारी आयु को बढ़ाया।

अँग्रेजी में पढ़िये – The lucky trio

भाग्यशाली तीन पेड़
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