कमरे से निरंतर कराहने की आवाज़ें आ रही थी। धीरे–धीरे उनकी तीव्रता बढ़ती जा रही थी। कराहटों का असर रामदेवी पर जितनी तेजी से पड़ रहा था उतने ही तेज उनके हाथ चल रहे थे। वह जल्दी–जल्दी बक्सा खखोल रही…

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बेटी
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