आज चीनू बहुत खुश था। उसकी मम्मी उसे एक छोटा बच्चा  दिखाने लायी थीं। मम्मी की एक दोस्त अस्पताल में थीं और उन्हें एक बेटी हुई थी। चीनू बहुत खुश हुआ छोटे बच्चे को देखकर। बहुत देर तक वह बच्चे के छोटे-छोटे हाथ पैर देखता रहा।

थोड़ी देर बाद चीनू थक गया और उसे थोड़ी-थोड़ी भूख भी लग रही थी। फिर मम्मी ने अपने बैग में से एक बिस्किट का पैकेट निकालकर चीनू को पकड़ा दिया। चीनू बिस्किट खाते-खाते इधर उधर घूमने लगा। ज़रा सी देर में मम्मी ने देखा कि चीनू तो कमरे में नही है। वे परेशान होकर उसे आसपास ढूँढने लगीं। जल्दी ही चीनू मिल गया तो उन्होंने चैन की साँस ली। उन्होंने चीनू को डाँटा भी कि वह अकेला कहाँ चला गया था। फिर उन्होनें देखा कि चीनू के हाथ में बिस्किट का पैकेट नहीं है। इतना छोटा बच्चा बिस्किट का छोटा पैकेट भी अकेला नहीं खा सकता था।

मम्मी ने पूछा, “चीनू, तुम्हारा पैकेट कहाँ है?”

तो चीनू ने बड़ा भोला सा मुँह बनाकर कहा, “वो जो आंटी सफाई कर रही हैं, उनके साथ जो बच्चा है ना, वह मेरे बिस्किट को देख रहा था, शायद उसे भूख लगी थी। तो मैंने उसको पैकेट दे दिया।”
मम्मी ने उसे डाँटने की बजाए उसे शाबाशी दी और यह भी कहा कि उसने बहुत अच्छा काम किया। दूसरों की मदद करना बहुत अच्छी बात है। चीनू शाबाशी पाकर बहुत खुश था।

बिस्किट का पैकेट
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