संध्या का समय था। सभी लड़के-लड़कियाँ खेलने के लिए घर से निकल पड़े थे,  लेकिन दृष्टि नहीं निकली। उसकी सहेलियाँ उसे बुलाने के लिए आयीं, परन्तु उसने मना कर दिया। मधुरिमा को चिंता हुई, “आखिर दृष्टि खेलने क्यों नहीं जा…

Want to read this? Sign in or subscribe.

      Subscribe

बिना भित्ति के चित्र बनाना
Average rating of 3 from 1 vote

Loading...