श्री राजगोपालन वासुदेवन को प्लास्टिक मन कह सकते हैं क्यूंकी उन्होने प्लास्टिक का उपयोग ढूंडा। कृष्णा जी ने सामने से आती अपनी पड़ौसन अपर्णा जी को देखा तो वे रुक गयीं। बोलीं, “मन्दिर से आ रही हैं भाभी?” “हाँ”, अपर्णा…

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प्लास्टिक मैन
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