पर्यावरण को सशक्त बनाना हम सब का कर्तव्य है। हमें पौधों की देखभाल ठीक से करनी चाहिए, क्यूंकी वही हमें रंग, सुगंध और औषधीय गुण प्रदान करते हैं।


इस ब्रह्माण्ड में मनुष्य के अपनी आँखें खोलने से पहले, प्रकृति माँ ने पौधों, झाड़ियों, घास, छोटी घास आदि पृथ्वी पर उगा दीं थीं जिससे कि उसका खाना, आश्रय, कपड़े और सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

पौधे केवल पौधे ही हैं। केवल मनुष्य उन्हें पृथक रूप में देखता है – या अपितु, उन्हें बहुत पास होने के बाद भी, शायद देखता ही नहीं। उदाहरण के तौर पर, हम अपने बच्चों को स्कूल बस में छोड़ने आते हैं तो पेड़ की छाया के नीचे खड़े होते हैं, स्कूल से वापस लौटने की प्रतीक्षा करते हुए भी ऐसा ही करते हैं, यदि अपनी कार खड़ी करनी है तो किसी वृक्ष के नीचे लगाने का प्रयत्न करते हैं, अचानक बारिश आ जाने पर वृक्ष के नीचे आश्रय लेते हैं, अपनी बस का इंतज़ार करते हुए दूसरों को सांसारिक मामलों पर अपनी राय देते हैं। इतना सब करते हुए हम उस वृक्ष की ओर देखते भी नहीं; यहाँ तक कि उसके सुन्दर फूलों की सराहना करना भी भूल जाते हैं।

वृक्ष जब फूलों से भरा होता है और यदि मनुष्य उसके पास से उसे देखे बिना, उसे सराहे बिना, उसे एक दोस्ताना स्पर्श किये बिना, यूँही निकल जाता है, तो वह रोता है। फिर भी मानव जाति के प्रति वृक्षों की वफादारी और दास्तान इतनी गहरी है कि वह चुप रहता है। वह अपने मन के भाव अपने तरीके से व्यक्त करता है, जैसे अपने पत्तों या पंखुड़ियों को हमारे ऊपर गिरा कर। परन्तु उसके यह भाव हम समझने में असफल रहते हैं।

लोगों को पौधों से जोड़कर पर्यावरण को सशक्त बनाना अपने लिए इंद्रधनुष बनाने जैसा है, जो न केवल आँखों के लिए सुखद है, बल्कि हमारे जीवन को जोश से भी भर देता है। वृक्षों का इंद्रधनुष के समान होना एक सुन्दर धारणा है। इसके बाद भी क्या आपको लगता है कि पर्यावरण को सशक्त बनाने की आवश्यकता है?

Paudhon se manushyon ko jodkar paryavaran ko sashakt banana

इससे आपके दिमाग में यह सवाल उठ सकता है कि पौधों के साथ क्यों जुड़ें और किसके लिए जुड़ें?

मानवीय व्यवहार हमारे लिए बहुत अच्छी तरह से ज्ञात है। भले ही हम उपरोक्त सलाह को ईमानदारी से, बिना किसी शर्त के लें और हो सकता है कि हम जल्दबाज़ी में कुछ पेड़ लगा भी दें, किन्तु उनकी देखभाल करना भूल जाते हैं। उन्हें पानी देने वापस नहीं जाते, या फिर उनमें इतना पानी डाल देते हैं कि वह झुकता चला जाता है और धीरे-धीरे पूर्णतया मर जाता है।

ऐसी कई अन्य चीजें हैं जिनसे किसी स्वस्थ पेड़ का उचित विकास हो सकता है। वृक्षों के अपने वैध अधिकार भी हैं जैसे उचित हवादार स्थान, खुली जगह, पानी, वृक्षारोपण के बाद की देखभाल, काट-छाँट, पानी से धोना, दवा आदि डालना, ऐसे चरण हैं जिनसे उनका उचित विकास हो सकता है।

किन्तु वास्तविकता की तरफ भी देखिये! उत्तराखंड से वैष्णो देवी तक, पूरी पहाड़ी श्रृंखला पर वन जल रहे हैं। यह सिर्फ इस वर्ष नहीं हुआ है, अपितु यह एक वार्षिक अनुष्ठान बन गया है जैसे कि किसी एजेंसी द्वारा प्रायोजित हो।

यह, हम सभी के लिए, हिसाब-किताब का समय है, जब हमें पौधों के साथ जुड़ने के लिए प्रयत्न करने होंगे और मजबूत निर्णय लेने होंगे।

मैं उम्मीद करता हूँ और ईमानदारी से यह भी चाहता हूँ कि हम अपने जीवन में वृक्षों की अद्भुत उपस्थिति के लिए आभार मानें और अपने हृदय में वृक्षों के लिए थोड़ी चिंता और प्यार रखें। हम इस विचार के साथ उनकी देखभाल करें कि वृक्ष हमारे लिए कितने कल्याणकारी है और हमें रंग, सुगंध और औषधीय गुण प्रदान करते हैं।

पौधों से मनुष्यों को जोड़कर पर्यावरण को सशक्त बनाना
Rate this post

Leave a Reply

Loading...