एक आम के पेड़ पर दो घोंसले थे। एक तोते का और दूसरा चिड़िया का। दोनो में ही उनके छोटे-छोटे बच्चे रहते थे, जो उड़ नहीं सकते थे। पेड़ पर ऊपर के भाग में चिड़िया अपने दो बच्चों के साथ रहती थी। चिड़िया भी उड़ नहीं सकती थी क्योंकि वह किसी शिकारी के जाल से घायल हो गयी थी। तोते अपने तीन बच्चों के साथ रहता था, उसका घोंसला चिड़िया के घोंसले से नीचे था।

तोते जब भी अपने बच्चों के लिये बाहर से दाना लेकर आते, तो चिड़िया और उनके बच्चों को भी दाना देते थे। ऐसे करते-करते दिन बीतने लगे और बच्चे बड़े होने लगे। एक दिन जब तोता दाना लेने गया हुआ था, तो एक बिल्ली आयी और पेड़ पर चढ़ने लगी। यह सब चिड़िया देख रही थी। जैसे ही बिल्ली तोते के घोंसले की तरफ़ बढ़ी, चिड़िया ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लगी। उसकी चहचहाने की आवाज़ सुनकर आस-पास के भी पक्षी आ गये। आ कर वह सभी भी ज़ोर से चीं-चीं करने लगे। इसे देख कर बिल्ली डर गयी और फिर वहाँ से भाग गयी। चिड़िया की समझदारी से तोतों के बच्चों की जान बच गयी।

Paropkaar

इस कहानी से हमको सीख मिलती है कि आपस में मिलजुल कर रहना चाहिये और एक दूसरे की मदद करनी चाहिये। तोते ने चिड़िया की सहायता की और चिड़िया ने तोतों के बच्चों की रक्षा की। इस प्रकार दोनों को ही फ़ायदा पहुँचा। इसलिये हमें कभी भी किसी की मदद से पीछे नहीं हटना चाहिये।

शब्दार्थ

  • परोपकार – दूसरों की मदद करना
  • रक्षा – परेशानी से बचाना
परोपकार
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