परियों की कहानी

पढ़ते पढ़ते सो जाती

जागती तो उनकी

कल्पना में खो जाती

माँ जब ख़ुशी से होती भरी

तब वे मुझको कहती परी

Pari

पर मेरे पर हैं कहाँ

जो उड़के छू लूँ आसमाँ?

मेहनत से पूरे करो अरमाँ

कामयाबी से छू लो आसमाँ

अपने वादों पर उतरो खरी

तुम ही तो हो हमारी परी

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परी
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