परियों की कहानी पढ़ते पढ़ते सो जाती जागती तो उनकी कल्पना में खो जाती माँ जब ख़ुशी से होती भरी तब वे मुझको कहती परी पर मेरे पर हैं कहाँ जो उड़के छू लूँ आसमाँ? मेहनत से पूरे करो अरमाँ…

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परी
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