कल सपने में वह मेरे आयी,

जब उसने अपनी छड़ी घुमायी,

चारों तरफ ख़ुशहाली सी छायी,

दुनिया बदली-बदली सी लग आयी,

अब न आपस में कोई द्वेष और न झगड़ा,

और न ही जाति-पाँति का भेद है दिखता,

हर तरफ प्यार ही प्यार है झलकता,

जब अनोखी छड़ी ने दिखाया जादू अपना,

मेरे घर पर भी उसने आकर,

आँगन को रंग-बिरंगा बनाया,

जब निराली छड़ी ने अपना,

अद्भुत कमाल दिखाया,

Pari ki chadi

आँख खुलते ही सब कुछ गया था बदल,

लग रहा था थोड़ा सा अलग,

न रहा वह सपना,

और न ही जादू की वह परी की छड़ी,

सोचती हूँ मैं उस सपने में ही रहती,

या फिर होती छड़ी मेरे पास,

और नींद से जग कर भी,

उस जादू को हर तरफ फैलाती,

काश! ऐसा हो जाता,

वह सपना वास्तविकता में बदल जाता,

मेरा आँगन फिर से रंग-बिरंगा हो जाता,

और वह प्यार चारों तरफ छा जाता।

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परी की छड़ी
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