हम पक्षी उड़ने वाले हवा में, हमको उड़ने दो, पिंजरों में बंद करके, हमें अपनो से मत दूर करो। सोने के पिंजरे से अच्छी लगती आज़ादी अपनी, नहीं चाहिये मेवा, सेवा, चुगने दो दाना अपना। बारिश, सर्दी या हो गरमी,…

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पक्षी की व्यथा
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