इस समय मैं सिर्फ नौ महीने की हूँ और धूप में बिना किसी बचाव के अपनी नाज़ुक जड़ों पर खड़े होते भविष्य की चिंताएँ मुझे यह सोचने को बाध्य कर देती हैं कि क्या मैं प्रकृति और मानवता की अनियमितता…

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नाज़ुक बातें
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