नन्ही परी के पापा का ट्रान्सफर होने वाला था। अभी तक वे लोग जहाँ रहते थे, वह शहर के बीच होने की वजह से आसपास गाड़ियाँ आती रहती थीं, इसलिए मम्मी परी को बाहर खेलने नहीं जाने देती थीं। अब परी यह सोच रही थी कि शायद उसे नए घर में बाहर खेलने की इजाज़त मिल जाये, तो कितनी अच्छी बात होगी।

पर वह एक बात से उदास भी थी। इस घर में उसकी एक दोस्त भी थी, और वह थी मकान मालिक की प्यारी सी छोटी सी पालतू बिल्ली मिन्की। परी स्कूल से लौटकर दिन भर मिन्की के साथ ऊपर नीचे दौड़ लगाती रहती थी। पर अब मिन्की का साथ छूट जाने की सोच कर परी उदास रहने लगी थी।

Naya ghar

एक दिन वह भी आ गया जब परी अपने मम्मी पापा के साथ नए घर चली गयी। मम्मी पापा वहाँ जाकर घर में सामान लगाने में व्यस्त हो गए। परी उदास होकर एक कोने में बैठी थी। उसे मिन्की की याद आ रही थी। वह सोच रही थी कि यदि मिन्की होती तो वह उसके साथ इस नए घर में खूब भागदौड़ करती।

तभी परी को कूँ कूँ की आवाज़ आयी। उसने देखा कि उसके पास एक छोटा सा कुत्ता खड़ा है। शायद कुत्ते को ठण्ड लग रही थी। उसे देखकर परी एकदम उत्साह से भर उठी। उसने मम्मी से गत्ते का एक खाली डिब्बा लिया, जिसमें नन्हे कुत्ते का घर बन सके। मम्मी ने कुछ पुराने कपड़े और पैकिंग का सामान भी उसके घर के लिए दे दिया, जिससे कुत्ते को गर्मी मिल सके। परी ने कुत्ते को उसमें बिठा दिया। कुत्ता घर में दुबककर बैठ गया। उसे अपना घर पसंद आ गया था। थोड़ी देर बाद मम्मी ने परी को एक बर्तन में दूध और ब्रेड दिया, कुत्ते को खिलाने के लिए। उसे खाकर कुत्ता परी के साथ खूब खेला। अब परी बहुत खुश थी, उसे नया दोस्त जो मिल गया था।

शब्दार्थ:

  • दुबककर – छुपकर
नया घर
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