माँ विद्यालय की डायरी देख रही थी। उसमें ‘गांधी जयन्ती’ के अवसर पर होने वाले कार्यक्रम की सूचना थी। दो श्रेणियाँ थी। एक – जिसमें बच्चों को गांधी जी का रूप धारण कर आना था। दूसरा – जिसमे माँ से गांधी जी के बारे में जानकारी ले, बोलना था।

माँ ने अन्नी से पूछा, “बताओ प्रतियोगिता कि किस श्रेणी में तुम्हे भाग लेना है?”

अन्नी बोला, “माँ, मुझे गांधी जी के बारे में बताइये”

माँ ने कहा, “यह ठीक है”

किस प्रकार बचपन से बड़े होने का सफर गांधी जी ने पूरा किया, और वे महात्मा बने। अन्नी को सुन कर बहुत आश्चर्य हुआ। उसे यह भी आभास हुआ कि बचपन में सभी बच्चे एक जैसे होते हैं। थोड़े शैतान, बड़ों की बातें कम सुनना और खेल- मस्ती में लगे रहना। 

लेकिन, जो समय के साथ सही दिशा में चलते हैं वे सफल और संतुष्ट जीवन जीते हैं। वे दूसरों की मदद और दिशा निर्देश देने की ताकत भी रखते हैं। 

माँ ने बड़ी रोचक घटनाएँ बताई, और बताया कि गांधीजी ने उन घटनाओं से सीख कर अपना जीवन संवारा।

इन सब में अन्नी को सबसे अच्छा लगा कि कोई भी मनुष्य बुरा नहीं होता। परिस्थितियाँ मात्र उसको बुरा बना देती है। परिस्थितियाँ किसी भी आम इंसान को महान, और महान इंसान को आम आदमी बना सकती हैं। इसलिए किसी भी व्यक्ति को बुरा मानने से पहले उसकी परिस्थितियाँ जानना आवश्यक है।  

शब्दार्थ

  • श्रेणियाँ – भाग
  • प्रतियोगिता – मुक़ाबला
  • परिस्थितियाँ – हालात

 

Background music: Remedy for Melancholy (Kai Engel) / CC BY 4.0

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नन्हा ज्ञानी
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