हमारी बेटियाँ एक नए ज़माने में कदम रख रहीं है। रिंकि के दादा-दादी ने कुछ ऐसा ही सोचा।  किशोरदास जी की पोती, रिंकी को आज अपनी सखा शिल्पा के जन्मदिन में जाना था। वह वहाँ जाने के लिए बहुत उत्साहित…

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नई सोच – हमारी बेटियाँ
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