दादाजी ने अर्णव को सिखाया की पैसे का कोई भी लेन-देन लिखित में होना ज़रूरी है। दादा जी को बरसों पहले की घटना आज भी अक्षरशः याद थी। वे आरामकुर्सी पर बैठ गये और अपने पोते अरनव को आपबीती सुनाने…

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दस रुपये का लेन-देन
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