तैराकी प्रतियोगिता
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उत्तर भारत में गर्मियों की लम्बी छुट्टियों होती है। जिसमें ज़्यादातर बच्चों को तैराकी सिखाई जाती है। कुछ बेहद शौक से सीखते है। कुछ को थोड़ी परेशानी होती है। जैसे – आंख में कान में पानी का भरना। लेकिन धीरे-धीरे अभ्यास कर आदत डाली जाती है।

    आठ वर्ष की शैल्या को भी तैरना अच्छा लगता था। लेकिन नाक को पानी से बचाना थोड़ा मुश्किल।

    शैल्या को तैराकी प्रतियोगिता में भाग लेना था। तैयारी हो गई। लेकिन वो कुछ विचार किये जा रही थी।

    पिता ने कहा, “चलो मैं साथ चलता हूँ। तुम किस विचार में हो? हारना-जीतना क्या इस विचार में हो ? यदि हाँ तो इस विचार को निकाल दो। सिर्फ भाग लो बस यही उत्तम विचार मानो”।

    शैल्या बोली, “नहीं पिता मेरा विचार अन्य है”।

    शैल्या का छोटा भाई काजू डेढ़ साल का हो गया था। उसे शब्दों का ज्ञान दिया जाने लगा था। जैसे – नाक पर उंगली रख कर बताते – यह नाक है।

    जब काजू से पूछते – काजू नाक कहाँ है? तब काजू सोच कर सर पर हाथ रख लेता। सभी सुन-देख कर खूब हँसते।

Tairaki pratiyogita

    शैल्या बोली, “अगर काजू की तरह मेरी नाक भी सर पर खिसक जाती, तो मैं बहुत उत्तम तरीके से तैराकी करती!”

शब्दार्थ:

  • तैराकी – पानी में तैरना
  • प्रतियोगिता – स्पर्धा
  • डेढ़ साल – एक साल छह महीना
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