सुंदर-सुंदर फूलों पर बैठी तितली, तभी चमक उठी बादल में बिजली, डर के इधर-उधर देख मचली, और वह पंख फैलाकर उड़ चली, तभी कुछ बारिश की बूँदें गिर पड़ी, तितली के पंख हो गये गीले-गीले, थोडी सी ठंड उसको थी…

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तितली-रानी
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