Post Series: आईये प्रकृति के रहस्यों को जानें

ज्वालामुखी पृथ्वी की ऊपरी परत में एक निकास द्वार है जिसमें से पृथ्वी की सतह के नीचे से लावा, गैस और चट्टानों के पिघले हुए टुकड़े हवा में फूटते हैं।

ज्वालामुखी – चलो! प्रकृति के रहस्यों को जानें

ज्वालामुखी – शब्द

रोमन आग के देवता का नाम वल्कन है। भूमध्य सागर में एक वल्कनो नामक द्वीप है, जिसमें एक सक्रिय ज्वालामुखी है। कहते हैं कि वल्कन वहाँ पर देवताओं के लिए हथियार बनाते हैं। इसलिए ज्वालामुखी का अर्थ है – वल्कन की भट्टी।

ज्वालामुखी क्यों फूटते हैं?

एक ज्वालामुखी के नीचे, चट्टानें इतनी गर्म हो जाती हैं कि वे पिघल जाती हैं। पिघली चट्टानों को मेग्मा कहा जाता है। गर्म मेग्मा बहुत दबाव उत्पन्न करता हुआ ऊपर की तरफ बढ़ता है और आखिर में यह पृथ्वी की दरारों के माध्यम से विस्फोटक तरीके से फूटता है।  

क्या-क्या बाहर आता है?

ज्वालामुखी विस्फोट के दौरान चट्टान के टुकड़े, धूल, गैस, राख, भाप और गर्म लावा आकाश की तरफ तेजी से फूटते हैं।

मेग्मा या पिघली हुई चट्टानों को लावा कहा जाता है जो कि पृथ्वी की सतह पर बाहर आता है। अलग अलग ज्वालामुखी से निकला लावा अपने तापमान और सिलिका तत्व के कारण अलग अलग प्रकार का होता है – कभी गाढ़ा, कभी पतला। घनत्व, सतह की ढलान और ज्वालामुखी उत्पादन दर पर निर्भर करते हुए कभी-कभी ये धीरे धीरे आगे बढ़ता है और कभी-कभी तेजी से बढ़ता है।

ज्वालामुखी से निकले चट्टानों के टुकडों को पाइरोक्लास्टिक (pyroclastic debris) मलबा कहा जाता है। उनके विभिन्न रूप और अलग अलग नाम हैं। सूक्ष्म चट्टानों के पाउडर वाले काले धुएं को राख कहा जाता है। छोटे छोटे टुकड़ों वाले लावा को अंगार कहा जाता है। हल्के वजन वाले पत्थर को, जिसमें हवा के बुलबुले होते हैं, झाँवा कहा जाता है।

ज्वालामुखी गैस ज्यादातर जल वाष्प, कार्बन-डाई-ऑक्साइड और सल्फर-डाई-ऑक्साइड के साथ-साथ हाइड्रोजन सल्फाइड, हाइड्रोजन क्लोराइड और हाइड्रोजन फ्लोराइड से मिलकर बनता है। हाइड्रोजन, धातु क्लोराइड, हेलो कार्बन आदि जैसे कुछ अन्य गैस भी ज्वालामुखी उत्सर्जन में पाए जाते हैं।

ज्वालामुखी – चलो! प्रकृति के रहस्यों को जानें

कटाव और घुमाव

अलग-अलग स्थानों पर फूटने वाले ज्वालामुखी अलग-अलग बनावट के हो सकते हैं। 

उनका रूप इनमें से एक हो सकता है:

  • पर्वत की तरह की बनावट जिनका मुख उनके शिखर पर होता है (माउंट रेनियर, वाशिंगटन, संयुक्त राज्य अमेरिका)
  • दरारों के रूप में (साइबेरियाई बाढ़ बेसाल्ट पठार, रूस)
  • लावा गुंबदों के रूप में (लैसेन पीक, कैलिफोर्निया, संयुक्त राज्य अमेरिका)
  • गुप्त गुंबदों के रूप में (माउंट सेंट हेलेंस, वाशिंगटन, संयुक्त राज्य अमेरिका
  • कवच के रूप में (हवाई द्वीप की ज्वालामुखी श्रृंखला)
  • कोन या राख कोन के आकार के (सूर्यास्त क्रेटर, एरिज़ोना)
  • परत या मिश्रित रूप के (मयोन ज्वालामुखी, फिलीपींस)

कुछ अन्य प्रकार के ज्वालामुखी भी होते हैं, उदाहरण के लिए:

  • क्रायो वोलकैनों (या बर्फ ज्वालामुखी) जो अन्य ग्रहों पर पाए जाते हैं जैसे शनि, नेपच्यून, बृहस्पति और उसके चन्द्रमाओं पर।
  • मड ज्वालामुखी जो मिट्टी के घोल से गठित होते हैं, और इनमें से लावा या उच्च तापमान नहीं निकलता।

सिडोरजो, इंडोनेशिया, में इस तरह का ज्वालामुखी है।

नाप जोख का टेप – वीईआई (VEI)

वीईआई (Volcanic Explosivity Index, VEI) ज्वालामुखी विस्फोट का सूचकांक है। इसका प्रयोग विस्फोट की मात्रा की पहचान के लिए किया जाता है। माप के आधार के लिए, यह सूचकांक ज्वालामुखी से निकलती हुई राख की ऊंचाई और बाहर निकले द्रव्य की मात्रा का उपयोग करता है।

पनडुब्बी (Submarine Volcanoes) और ग्लैसियर के नीचे पाये जाने वाले ज्वालामुखी (Subglacial Volcanoes)

पनडुब्बी ज्वालामुखी पानी के नीचे होते हैं। इन ज्वालामुखियों का ऊपरी भाग जब महासागर के ऊपर निकल आता है, तो वह द्वीप बन जाता है।

ग्लैसियर के नीचे पाये जाने वाले ज्वालामुखी (Subglacial volcanoes) बर्फ की परत के नीचे विकसित होते हैं।

पिघलती हुई बर्फ शिखर पर लावा को दबा देती है और ऊपर एक समतल पहाड़ रह जाता है।

सुपर वोल्कनो

यह बहुत अधिक विनाश की शक्ति रखते हैं। यह एक विशाल क्षेत्र में फैले होते हैं, और ये कई वर्षों के लिए धरती का तापमान शांत कर सकते हैं। इन बड़े विस्फोट से तापमान प्रभावित हो सकता है क्योंकि सल्फ्यूरिक एसिड की बूंदें सूरज को धुंधला कर देती हैं और पृथ्वी से निकलने वाली गर्मी को सोख लेती हैं। इस प्रकार पृथ्वी का वायुमंडल ठंडा हो जाता है। न्यूजीलैंड में झील टॉपो इसका एक उदाहरण है।

ज्वालामुखी – चलो! प्रकृति के रहस्यों को जानें

क्या सोया हुआ विशाल महाकाय फिर से जागेगा?

आमतौर पर लोग ज्वालामुखी को तीन प्रकार से वर्गीकृत करते हैं – सक्रिय, निष्क्रिय या विलुप्त।

एक सक्रिय ज्वालामुखी वह है जिसमें पिछले १०,००० साल में विस्फोट हुआ हो।

(वर्तमान में, वानुअतु में माउंट यासूर, सबसे लंबे समय से चल रहा ज्वालामुखी है, जो हर १११ साल में फूटता है।)

एक सुप्त ज्वालामुखी वह है जो पिछले १०,००० साल में नहीं फूटा है, लेकिन जिसके फिर फूटने की उम्मीद है। (अलास्का में फोरपीक्ड माउंटेन इसका एक उदाहरण है।)

एक विलुप्त ज्वालामुखी वह है जिसके फिर फूटने की कोई उम्मीद नहीं है। (कहा जाता है कि स्कॉटलैंड में एडिनबर्ग कासल एक विलुप्त ज्वालामुखी की चोटी पर स्थित है।)

लेकिन, सुनिश्चित तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता। विलुप्त ज्वालामुखी से विस्फोट के कई उदाहरण रहे हैं। माउंट वेसुवियस विलुप्त ज्वालामुखी माना जाता था और ७९ ई में अपने विस्फोट से पहले, बगीचों और अंगूर के बागों से ढका हुआ था। इसने हेरकुलानेउम और पॉम्पी नगरों को नष्ट कर दिया था। मोंटसेराट के द्वीप पर स्थित सौफरिएर हिल्स ज्वालामुखी लंबे समय से निष्क्रिय था और विलुप्त माना जाता था। आसपास के क्षेत्रों में लोगों को इसके बारे में मालूम भी नहीं था जब तक कि ये फिर से सक्रिय नहीं हो गया।

महान क्षति

किसी भी अन्य प्राकृतिक आपदा की तरह, ज्वालामुखी विस्फोट आसपास के क्षेत्र को काफी नुकसान पहुंचा सकता है। आस-पास रहने वाले निवासी, जीवन और संपत्ति भारी नुकसान का सामना कर सकते हैं। ज्वालामुखी विस्फोट कई अन्य खतरों को भी बढ़ा देता है। उदाहरण के लिए, ज्वालामुखी राख, विमानों के लिए खतरा बन सकती है। ज्वालामुखी विस्फोट में निकली हुई गैस के कारण अम्ल वर्षा हो सकती है। जब पनडुब्बी ज्वालामुखी फूटते हैं तो विशाल लहरों के कारण तटीय क्षेत्र उजड़ सकते हैं। इतिहास बताता है कि कुछ खतरनाक और बड़े विस्फोट से ऐसी ज्वालामुखी सर्दी पड़ी जो विनाशकारी अकाल का कारण बनी।

मित्र और समर्थक

ज्वालामुखी विस्फोट आम तौर पर अन्य प्राकृतिक आपदाओं के साथ आते हैं। भूकंप, बाढ़, मिट्टी का बहाव, भूस्खलन, अम्ल वर्षा, आग, सुनामी इसके कुछ साथी हैं।

लेकिन सब कुछ बुरा नहीं है

ज्वालामुखीय क्षेत्रों में अत्यंत उपजाऊ मिट्टी भी मिलती है जो कि पौधों के जीवन के लिए बहुत अच्छी है। उदाहरण के लिए, इटली में अधिकतर जगह चूना पत्थर की चट्टानें हैं और बंजर मिट्टी है, लेकिन नेपल्स (माउंट वेसुवियस के स्थल) के आसपास के क्षेत्र में बहुत उपजाऊ मिट्टी है और इसमे अंगूर की बेलें हैं। ज्वालामुखी कि चट्टानों में कीमती पत्थर और धातु भी होते हैं जैसे हीरा और लोहा। कुछ पनडुब्बी ज्वालामुखियों से नए द्वीप भी बनते हैं।

ड्रैगन को वश में करना

अपनी तरह के एक प्रयोग में, आइसलैंड में कार्बन पुनर्चक्रण इंटरनेशनल (Carbon Recycling International) ने एक ज्वालामुखी के पास में एक संयंत्र का निर्माण किया है। ज्वालामुखी इस भूतापीय बिजली संयंत्र (geothermal electricity plant) को ऊर्जा देता है। यह संयंत्र कार्बन डाइऑक्साइड (carbon-dioxide) के उत्सर्जन को भी ग्रहण करता है और उसे वलकनोल (Vulcanol) नामक एक तरल ईंधन में बदल देता है।

भारत में ज्वालामुखी

भारत में केवल एक सक्रिय ज्वालामुखी मिला है जो कि अंडमान सागर में बैरन द्वीप पर स्थित है। अंडमान सागर में नारकोंडम भारत का एक सुप्त ज्वालामुखी है। ढिनोधार पहाड़ी (गुजरात) और धोसी पहाड़ी (हरियाणा और राजस्थान की सीमा पर) भारत के विलुप्त ज्वालामुखी माने जाते हैं। अंडमान सागर में बड़ातांग भारत का एक मड ज्वालामुखी है।

तथ्यों की जांच

हवाई का मौना लो सभी ज्वालामुखियों में सबसे बड़ा है। इसका फैलाव, १०,२०० घन मील (४२,५०० घन किलोमीटर) तक है।

सबसे सक्रिय ज्वालामुखी माउंट सेंट हेलेंस है। (वाशिंगटन, संयुक्त राज्य अमेरिका में स्थित) उत्तर पश्चिमी प्रशांत महासागर में तमु मस्सिफ  सबसे ज़्यादा द्रव्यमान और सबसे फैला हुआ ज्वालामुखी है।

नीव से शिखर तक सबसे ज़्यादा ऊंचाई वाला ज्वालामुखी हवाई द्वीप पर मनुआ की है।

एंडीज पर्वत श्रृंखला में स्थित ज्वालामुखी ओजो डेल सलाडो  अपने शिखर की ऊंचाई के कारण सबसे ऊंचा ज्वालामुखी माना जाता है।

इटली का माउंट एटना दुनिया का सबसे पुराना सक्रिय ज्वालामुखी है। इसका पहला विस्फोट १५०० ई.पू. में रिकॉर्ड किया गया था। तब से, एटना १९० बार फूट चुका है।

जापान का माउंट फ़ूजी अपने सुंदर आकार के लिए सबसे खूबसूरत ज्वालामुखी माना जाता है।

हम अकेले नही हैं

ज्वालामुखी विस्फोट एकमात्र हमारे ग्रह पृथ्वी के लिए ही नहीं हैं। शुक्र, बृहस्पति और मंगल ग्रहों की सतह पर भी ज्वालामुखी गतिविधियाँ दिखी हैं। मंगल ग्रह पर ओलिंपस मॉन्स नामक एक नया सक्रिय ज्वालामुखी हमारे सौर मंडल (Solar system) का सबसे बड़ा ज्वालामुखी है। मंगल ग्रह का यह ज्वालामुखी आसपास के मैदानों से १६ मील (२५ किमी) की ऊंचाई पर है और ३७४ मील (६२४ किमी) भर में फैला है।

पृथ्वी के चंद्रमा पर कोई ज्वालामुखी नहीं है और न ही कोई ज्वालामुखी गतिविधि है। बृहस्पति, शनि और नेपच्यून के चन्द्रमाओं पर सक्रिय ज्वालामुखी दिखे हैं। बृहस्पति ग्रह का आईओ नामक चंद्रमा, सौर प्रणाली का सबसे सक्रिय ज्वालामुखी है।

पौराणिक कथाएं

यूनानी पौराणिक कथाओं के अनुसार, टाइफन एक विचित्र प्राणी था जिसके एक सौ साँपों के सिर थे। उसका सिर तारों को छूता था, विष उसकी आंखों से निकलता था, और लावा और लाल गर्म पत्थर उसके खुले हुए मुँह से निकलते थे। उसकी फुफकार एक सौ सांप के बराबर थी, और वह सौ शेरों की तरह गरजता था। जीयस, जो कि आकाश और तूफान के देवता हैं और सभी देवताओं के राजा हैं, उनका एक बार टाइफन के साथ घमासान युद्ध हुआ। युद्ध इतना भयंकर था कि लगभग सभी जीवित चीजें नष्ट हो गईं। ज़ीउस ने टाइफन को अच्छा निशाना लगाकर सौ थंडर बोल्ट से मारा जिससे एक विशाल पर्वत टाइफन के ऊपर गिर गया और टाइफन उसके नीचे दब गया। हालांकि टाइफन ज़मीन के नीचे बंदी है, यह अभी भी जिंदा है और पहाड़ की चोटी से आग, लावा और धुआँ उगलता रहता है। यही कारण है कि ज्वालामुखी अभी भी फूटते हैं।  

उत्सव का समय

प्राचीन रोम में, वुलकनालीय नामक एक त्योहार मनाया जाता था। इसे मनाने की तारीख हर साल २३ अगस्त थी। लोग एक ज्वालामुखी की नकल का अलाव बनाते थे और जानवरों को आग में फेंक कर उनकी बलि देते थे। ऐसा करके वे देवताओं को शांत करके ज्वालामुखी से खुद की रक्षा करना चाहते थे ।

हास्यमय बात

१६ वीं सदी के जर्मन खगोलशास्त्री (astronomer) योहानेस केप्लर का मानना था कि ज्वालामुखी पृथ्वी के आँसुओं के लिए बनी नलिकायें हैं।

आओ, लाल गर्म लावा में डूब जाएँ  

ज्वालामुखी के अध्ययन को वोल्कनोलोजी कहते हैं। कैरियर के रूप में इसे अपनाने के लिए, विभिन्न संस्थान हैं, जो कि एक पाठ्यक्रम चलाते हैं जो वोल्कनोलोजिस्ट बनने में मदद कर सकता है। मुंबई में स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (Indian Institute of Technology, Mumbai) उनमें से एक है।

अंग्रेज़ी में पढे

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