गर्मी की छुट्टियाँ शुरू हो गई। बच्चों का क्रिकेट संघ मैदान में सुबह सुबह इकठ्ठा हो गया। सभी बल्ला, गेंद और विकेट आदि सामान के साथ पूरे जोश से एक साथ आ गए। खेल की तैय्यारी, टीम बनाना, आदि बातें चल रही थी।

लेकिन तभी उनमें सबसे छोटा बच्चा अभ्युदय चीख कर बोला, “जल्दी आओ! देखो ये क्या हो गया? अभी तो हमने बॉल फेंकी भी नहीं, फिर इसे चोट कैसे लग गई?”

सभी बच्चे इकठ्ठा हो गए। देखा तो एक चिड़िया घायल पड़ी थी। उसके पंख और एक पैर में चोट थी, जिससे वो आँख बंद किये निढाल सी पड़ी थी। बच्चों के आने से हल्का सा फड़फड़ा कर कोशिश की, लेकिन उड़ नहीं पा रही थी।

सभी बच्चे समझदार और सवेंदनशील थे। उन्हें घर और विद्यालय दोनों से ज्ञान की बाते निरन्तर मिलती रहती है, जैसे

– प्राथमिकताओं पर ध्यान दो।

– समसायाओं का निवारण स्वयं करो।

– सभी की सलाह एवं सहयोग से किया काम उत्तम होता है।

– ज्ञान मात्र प्राप्त करने के साथ प्रयोग करना उत्तम है।

– वातावरण का संरक्षण सबसे उत्तम है।

gyan ka prayog

उन्होंने क्रिकेट का सामान एक तरफ रख दिया, सबसे पहले चिड़िया को बचाने पर विचार किया। उन्होंने देखा माली बगीचे में काम कर रहा था। विहान ने तुरंत माली से टोकरा माँगा और कहा। “इसे हम चिड़िया के लिए ले रहे हैं, अपने खेलने के लिए नहीं। इसलिए आप अभी मत लेना”। माली की तुरंत स्वीकृति मिल गयी।

सबसे पहले चिड़िया को धीरे से उठा कर पेड़ के नीचे लिटा  दिया। फिर गौरव ने उसे धीरे से अपनी बोतल से पानी पिलाया। चिड़िया आँखे फड़फड़ाने लगी। अननमय ने कहा, “चलो चोट पर तुलसा और नीम के पत्तों का लेप लगाते है”। माली की मदद से तुलसा और नीम के पत्ते मिल गए। वहीं पर बच्चों ने पत्थर पर रगड़ कर लेप बनाया और चोट पर लगा दिया।

तब तक राजू और मीका घर से चिड़िया के लिए दाल चावल के दाने और एक रोटी का टुकड़ा ले आये।

चिड़िया पानी पी कर और दाने-रोटी खा कर खुश लग रही थी।  उसे टोकरे से ढक कर सुरक्षित कर दिया। फिर वो सब क्रिकेट खेलने लगे।

अगले दिन सुबह फिर से सब इकट्ठा हुए और टोकरा उठाया तो देखा चिड़िया पूरे पंख फैला रही थी और टोकरा हटाते ही उड़ने लगी। सभी ने खूब ताली बजाई। चिड़िया ने बच्चों के ऊपर गोल गोल चक्कर काट कर, चहक-चहक सबको आशिर्वाद दिया।

अब एक नियम बन गया। सभी बच्चे बारी बारी से रोज़ चिड़ियाओं के लिए पानी और दाने डालने लगे।

शब्दार्थ

  • फड़फड़ाना – शरीर को धीरे से हिलाना
  • संवेदनशील – कोमल
  • संरक्षण – सम्हालना
ज्ञान का प्रयोग
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