मैं अब हनुमान बनूँगा, मुकुट सिर पर पहनूँगा, गदा साथ लेकर चलूँगा, और सबसे ताक़तवर बन जाऊँगा, फिर संजीवनी पर्वत भी ले आऊँगा, सभी के कष्ट दूर करूँगा, नहीं किसी को बीमार होने दूँगा, उड़कर इधर-उधर सैर भी कर लूँगा,…

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जब मैं हनुमान बन जाऊँगा
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